लोगों का कहना
विस्थापन के दौरान आश्वासन मिला था कि प्रभावितों को पुनर्वास स्थल पर टिहरी शहर से चार गुना अच्छी सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन बुनियादी सुविधा तक नहीं मिली। यही वजह है कि व्यापारी पलायन को मजबूर हैं। -देवेंद्र नौडियाल, स्थानीय निवासी
टिहरी बांध परियोजना से प्रभावित परिवारों के पूर्व लंबित जल मूल्य एवं सीवर शुल्क देयकों को माफ किया जाना था, इसका शासनादेश भी हुआ, इसके बावजूद अधिकतर प्रभावितों से पानी और सीवर शुल्क की वसूली की गई। -कमल सिंह महर, बौराड़ी निवासी
पुरानी टिहरी में चौतरफा सुविधाएं थी, व्यापारियों का अच्छा व्यापार चलता था, लेकिन यहां पुनर्वास स्थल पर पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। बौराड़ी बस अड्डे से पहले नैनीताल, चंडीगढ़, दिल्ली आदि शहरों के लिए परिवहन निगम की बस सेवाएं थी, जो कोविड के बाद से बंद हैं। -एमएल सिमल्टी, स्थानीय निवासी
क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। अस्पताल उचित सुविधाओं, चिकित्सकों और उपकरणों की कमी के कारण केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं। यही वजह है कि क्षेत्र के लोग मेडिकल कॉलेज की मांग के लिए आंदोलनरत हैं। -त्रिलोक सिंह रमोला, स्थानीय निवासी
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बौराड़ी और आस-पास के क्षेत्रों में कई प्रभावित गांव हैं, क्षेत्र में पेयजल की पर्याप्त सुविधा है। क्लोग जिस रि घुत्तु की बात कर रहे हैं, वह क्षेत्र से 100 किलोमीटर दूर है। टिहरी झील से उन्हें पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है। लोगों को जो समस्याएं हैं, उससे उन्हें अवगत कराएं तो उसे दिखवाया जाएगा। -निकिता खंडेलवाल, जिलाधिकारी टिहरी