जिले में वर्ष 2010 से लघु सिंचाई विभाग की 14 सौ से अधिक नहरें क्षतिग्रस्त हैं। काश्तकार लगातार नहरों की मरम्मत करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन विभाग बजट का अभाव बताकर पल्ला झाड़ रहा है।
जिले के अधिकतर क्षेत्रों में सिंचाई की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी लघु सिंचाई विभाग की है। वर्ष 2010 से 1434 योजनाएं अलग-अलग सालों में आई आपदा से क्षतिग्रस्त पड़ी है, जिससे 4895 हेक्टेअर सिंचित भूमि को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। सबसे अधिक 325 योजनाएं भिलंगना में ही हैं, जबकि जौनपुर में 233, प्रतापनगर में 204, जाखणीधार में 140, चंबा में 127, थौलधार में 104, नरेंद्रनगर में 105, देवप्रयाग में 101 और कीर्तिनगर में 95 योजनाएं क्षतिग्रस्त पड़ी हैं।
स्थिति यह है कि विभाग को राज्य गठन के बाद से ही मरम्मत के लिए बजट नहीं मिल पा रहा है, जिससे ग्राम पंचायतें मनरेगा से काम चलाऊ व्यवस्था बनाते रहे हैं। लेकिन अब वहां भी बजट की कमी महसूस की जा रही है। जिससे ज्यादातर काश्तकार नहरों की मरम्मत के लिए लघु सिंचाई विभाग पर निर्भर हैं।
नहरों की मरम्मत के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत केंद्र सरकार को वर्ष 2016 से प्लान भेज रहे हैं। इस बार भी 76 करोड़ का प्लान भेजा गया है। बजट मिलते ही मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा।
- अतुल कुमार पाठक, ईई, लघु सिंचाई विभाग नई टिहरी