केंद्र और राज्य की डबल इंजन की सरकार पिछले चार सालों में केंद्रीय पूंजी निवेश उपदान योजना -2013 के तहत नये उद्योग स्थापित करने वाले तथा पुराने उद्योगों में प्लांट एंड मशीनरी में इजाफा करने वाली जिले की 47 फैक्ट्रियों की करीब 1551 लाख रुपयों की कर्जदार है।
योजना के तहत प्रदेश भर में पूंजी निवेश करने वाली जिन 86 फैक्ट्रियों को सब्सिडी नहीं मिल पाई है, उनमें से 47 फैक्ट्रियां अकेले हरिद्वार जिले की है। आंकडों के मुताबिक चार सालों में जिले में निवेश करने वाले 52 फैक्ट्रियों में से महज चार को सब्सिडी मिल पाई है। सब्सिडी नहीं मिल पाने के कारण उद्योगों की माली हालत खस्ता हो रही है। ऊपर से बैंकों का ऋण भी उद्योगों की कमर तोड़ रहा है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से राज्य में नए सिरे से उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2013 में केंद्रीय पूंजी निवेश उपादान योजना लागू की गई थी। जिसके तहत नए उद्योग स्थापित करने अथवा पुराने उद्योगों को विस्तार देने के लिए किए गए पूंजी निवेश पर केंद्र सरकार की ओर से 15 प्रतिशत सब्सिडी दी जानी थी। इस योजना का लाभ पाने के लिए प्रदेश भर में 2013 से 110 फैक्ट्रियों की ओर से पूंजी निवेश किया गया।
जिनमें से अभी तक मात्र 24 फैक्ट्रियों को ही सब्सिडी मिल पाई। जबकि प्रदेश की 86 फैक्ट्रियां आज भी सब्सिडी की राह देख रही हैं। इन 86 फैक्ट्रियों में 47 फैक्ट्रियां अकेले हरिद्वार जिले में स्थापित हुई है। जिला उद्योग केंद्र रुड़की से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक जिले की 47 फैक्ट्रियों की ओर से किए गए पूंजी निवेश के एवज में करीब 1551 लाख रुपये की सब्सिडी दी जानी है। लेकिन अभी तक जिले के उद्यमियों को यह भारीभरकम रकम नहीं मिल सकी है। जिससे उद्योग तमाम तरह की परेशानियां झेल रहे हैं।
गौरतलब है कि सब्सिडी की स्वीकृति राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली स्टेट लेवल कमेटी प्रदान करती है। लेकिन 2013 के बाद से अभी तक मात्र एक बार 27 सितंबर 2016 को ही कमेटी की बैठक हो पाई है। जिसमें 24 फैक्ट्रियों को ही सब्सिडी दिए जाने की स्वीकृति मिल पाई थी। उद्योग निदेशालय देहरादून के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी केके कोटनाला के मुताबिक अभी 86 फैक्ट्रियों की सब्सिडी लंबित चल रही है। बताया गया है कि यह कमेटी केंद्र ओर से जारी होने वाले बजट के बाद ही आयोजित होती है।
ऐसे में माना जा रहा है कि केंद्र सरकार की ओर से ही सब्सिडी के मद में बजट जारी होने में विलंब हो रहा है। इस बाबत जिला उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक अंजलि रावत ने बताया कि उनके यहां से जो आवेदन प्राप्त हुए हैं, उन्हें स्वीकृति के लिए भेज दिया जाता है। उन्होंने बताया कि जनवरी माह में स्टेट लेवल कमेटी की बैठक होने की उम्मीद जताई जा रही है। जिसमें सब्सिडी को स्वीकृति प्रदान की जाएगी।
जिले में 2013 के बाद से इन फैक्ट्रियों ने मांगी सब्सिडी
वर्ष फैक्ट्रियों की संख्या
2014 08
2015 11
2016 14
2017 19
कुल 52
30 मार्च 2018 तक कर सकते हैं क्लेम
जिला उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक अंजलि रावत ने बताया कि केंद्र सरकार की पूंजी निवेश योजना उपादान योजना- 2013 की समायवधि मार्च, 2017 तक थी। इस अवधि के बीच उद्योग आदि का रजिस्ट्रेशन करा चुके उद्यमी 30 मार्च 2018 तक सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के बाद स्टेट लेवल कमेटी की ओर से सब्सिडी को स्वीकृति प्रदान की जाती है।
प्रदेश के उद्योगों की लंबित है 2838 लाख की सब्सिडी
केंद्रीय पूंजी निवेश योजना के तहत 2013 के बाद से पूंजी निवेश करने वाली 86 फैक्ट्रियों को सब्सिडी नहीं मिली है। हरिद्वार जिले में 47 फैक्ट्रियों को 1551 लाख की सब्सिडी लंबित है। जिसके हिसाब से एक फैक्ट्री को औसतन 33 लाख की सब्सिडी मिलनी है। इस हिसाब से प्रदेश भर में 86 फैक्ट्रियों को मिलने वाली इस सब्सिडी की रकम करीब 2833 लाख रुपये बैठती है।
14 सालों में जिले में लगे 677 उद्योग
जिला उद्योग केंद्र रुड़की में 2003 से 2017 तक कुल 677 उद्योग रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। यें उद्योग भगवानपुर, लक्सर, झबरेड़ा, लंढौरा, दौलतपुर, पथरी और हरिद्वार के सिडकुल में स्थापित हुए हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि इन उद्योगों से जहां क्षेत्र में रोजगार पैदा हुए हैं वहीं राज्य की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है, लेकिन यदि भगवानपुर क्षेत्र में लगे करीब 500 उद्योगों की बात करें तो यहां प्रदेश सरकार की ओर से 14 सालों बाद भी मूलभूत सुविधा विकसित नहीं हो सकी है। हाल ही में भगवानपुर में जिलाधिकारी के साथ हुई उद्यमियों की बैठक में औद्योगिक क्षेत्र में जल निकासी, सड़क, बिजलीघर जैसी तमाम सुविधाओं को दिए जाने की मांग उठाई गई। लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम उठते नहीं दिखाई दे रहे हैं।