फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिक्षक दिवस विशेष: घटती छात्र संख्या के बीच इन शिक्षकों की पहल ने बदली उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों की तस्वीर

Fri, 04 Sep 2026 01:53 PM IST
Renu Saklani बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला, देहरादून

सार

जहां सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या चिंता बढ़ा रही है, वहीं कुछ शिक्षकों ने अपने प्रयासों से इस चुनौती के बीच उम्मीद की नई कहानी लिखी है। बेहतर माहौल से लेकर अभिभावकों को जोड़ने तक, इन शिक्षकों की पहल बता रही है कि बदलाव की शुरुआत अगर स्कूल से हो, तो तस्वीर बदली जा सकती है।
विज्ञापन
शिक्षक ख्याति दत्त शर्मा और डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या तेजी से घट रही है। स्थिति यह है कि पांच हजार से अधिक सरकारी स्कूल बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। घटती छात्र संख्या ने शिक्षा विभाग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। हालांकि, इसी चुनौती के बीच कुछ शिक्षकों के नवाचार और प्रेरणादायी प्रयासों ने सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने की उम्मीद जगाई है।

इन शिक्षकों ने अपने स्तर पर स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करने, अभिभावकों को जोड़ने और बच्चों को सरकारी स्कूलों की ओर आकर्षित करने के लिए कई प्रभावी पहल की हैं। उनके प्रयास न केवल समाज में मिसाल पेश कर रहे हैं, बल्कि शिक्षा विभाग में भी नई ऊर्जा का संचार कर रहे हैं।

विज्ञापन


जरूरत इस बात की है कि ऐसे शिक्षकों के प्रयासों को प्रोत्साहित किया जाए और उनकी सफल पहलों को दूसरे स्कूलों तक पहुंचाया जाए। यदि अन्य शिक्षक भी इसी तरह बदलाव का संकल्प लें और स्कूलों की व्यवस्था सुधारने के लिए ईमानदारी से प्रयास करें, तो सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या की चुनौती को काफी हद तक दूर किया जा सकता है। इससे न केवल बंदी के कगार पर पहुंच चुके स्कूलों को बचाया जा सकेगा, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा।
 

विज्ञापन

ख्याली दत्त शर्मा और साथी शिक्षकों ने पेश की मिसाल

राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय कपकोट के प्रधानाध्यापक ख्याली दत्त शर्मा और स्कूल के साथी शिक्षकों के प्रयास से वर्ष 2016 में 38 छात्र संख्या वाले स्कूल में अब 324 बच्चे अध्ययनरत हैं। खास बात यह है कि इस स्कूल के 50 से अधिक बच्चे सैनिक स्कूल घोड़ाखाल एवं अन्य सैनिक स्कूलों में दाखिला पा चुके हैं। यही वजह है कि स्कूल में बच्चों के दाखिले के लिए अभिभावकों की लंबी लाइन लगी रहती है। स्कूल के प्रधानाध्यापक ख्याली दत्त शर्मा के मुताबिक स्कूल के शिक्षकों ने शिक्षक का जो दायित्व होता है, उसे ईमानदारी से निभाया। स्कूल समय के बाद बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त में तैयारी कराई जाती है।

श्रीवास्तव की अनूठी पहल से शत प्रतिशत हुआ स्कूल का परिणाम

राजकीय इंटर कॉलेज भगवानपुर धारकोट के प्रधानाचार्य डॉ. अतुल कुमार श्रीवास्तव एवं साथी शिक्षकों के प्रयास से स्कूल का 10वीं और 12वीं का परिणाम पिछले चार साल से शत प्रतिशत है। स्कूल के प्रधानाचार्य के मुताबिक कोई बच्चा पढ़ाई में कमजोर न रहे इसके लिए लॉटरी निकालकर हर शिक्षक को चार से पांच बच्चों की जिम्मेदारी दी गई।

ये भी पढे़ं...उत्तराखंड: प्रदेश के लिए कारगर हो सकती है तेलंगाना की 5-जी एंबुलेंस, आपात चिकित्सा को मिलेगी नई रफ्तार

इसके अलावा नौवीं से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं को स्कूल में मुफ्त मध्याह्न की सुविधा दी जा रही है। इस पर आने वाला खर्च स्कूल के प्रधानाचार्य और साथी शिक्षक उठा रहे हैं। स्कूल प्रधानाचार्य के शिक्षा के क्षेत्र में किए गए इस उत्कृष्ट कार्य के लिए उनका चयन शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार के लिए किया गया है। पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर उन्हें राज्यपाल पुरस्कृत करेंगे।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें