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शिक्षक दिवस 2019: इन्होंने दीवारों पर समेटा पाठ्यक्रम, पढ़ें ऐसे ही कुछ शिक्षकों के बारे में

Thu, 05 Sep 2019 10:46 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal संदीप थपलियाल, अमर उजाला, श्रीनगर

सार

- वेतन से सवा लाख रुपये खर्च कर सजा दिया विद्यालय
- प्रावि बडोन के प्रधानाध्यापक प्रीतम बर्त्वाल की मेहनत रंग लाई

 
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ऐसे सजा दिया स्कूल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विकासखंड कीर्तिनगर में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय बडोन के प्रधानाध्यापक प्रीतम बर्त्वाल ने पूरा पाठयक्रम स्कूल की दीवारों में समेट दिया है। यहां की हर दीवार में पर सामान्य ज्ञान, व्यवहारिक ज्ञान और स्कूली पाठ्यक्रम उकेरा हुआ है। स्कूल के बच्चे चाहे आसान शैली में पहाड़े हो या फल-सब्जियों का ज्ञान, दीवारों से हासिल कर लेते हैं। स्कूल के लिए फर्नीचर की व्यवस्था भी उन्होंने की है। विद्यालय को सजाने संवारने के इस काम में बर्त्वाल अभी तक सवा लाख रुपये तक अपने वेतन से खर्च कर चुके हैं।

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लगभग दो वर्ष पूर्व प्राथमिक विद्यालय बडोन के भवन का नवनिर्माण किया गया था। भवन का निर्माण तो हो गया, लेकिन स्कूल में बच्चों के बैठने के लायक व्यवस्थाएं नहीं थी। सफेद दीवारें भी खाली-खाली लगती थी। तब विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रीतम बर्त्वाल ने स्कूल की दीवारों को इस प्रकार से रंगवाने का निर्णय लिया। उनका मानना था कि दीवारों को इस प्रकार रंगा जाए कि वह बच्चों के काम आए। जिस भी दीवार पर बच्चों की नजर जाए, वह कुछ न कुछ सीखे। इसके लिए उन्होंने देहरादून से विशेष तौर पर दो पेंटर बुलाए। पेंटरों ने स्कूल और मिड डे मील किचन सहित अन्य स्थानों पर टीएलएम (शिक्षण अधिगम सामग्री) की चित्रकारी की। चित्रकारी होने से विद्यालय आकर्षक तो लगता ही है, साथ ही बच्चे इन दीवारों से कुछ न कुछ सीखते हैं। बच्चों को बैठने में दिक्कत न हो, इसके लिए बर्त्वाल अपने खर्चे से फर्नीचर भी ले आए। 

बहुत ही सुंदर सजाया है स्कूल

विद्यालय में फुलवारी और क्यारियां बनाई गई हैं। प्रत्येक दिन बच्चों को योगाभ्यास भी कराया जाता है। बच्चों को प्रतियोगिता की भी तैयारी करवाई जा रही है। पेंटिंग और फर्नीचर में सवा लाख रुपये से ऊपर खर्चा आया है, लेकिन बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए यह जरूरी है।
- प्रीतम बर्त्वाल, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय बडोन

मैंने स्कूल देखा है। यह विद्यालय बहुत ही सुंदर सजाया गया है। ऐसे ही शिक्षक स्कूलों की शोभा बढ़ाते हैं।
- एसएस बिष्ट, डीईओ (बेसिक) टिहरी

बच्चों ने निजी स्कूल छोड़ इसमें लिया दाखिला 

सरकारी प्राथमिक विद्यालय का नाम सुनते ही हमारी आंखों के सामने संसाधनविहीन दो-तीन कमरों के स्कूल की तस्वीर तैरने लग जाती है। लेकिन, कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं, जिन्होंने खुद के प्रयासों से इन्हें मॉडल स्कूल में बदल दिया है। ऐसे ही एक शिक्षक हैं देहरादून के राजकीय प्राथमिक विद्यालय सिंघनीवाला के प्रधानाध्यापक गंभीर सिंह। 

ग्रामीण क्षेत्र में स्थित इस विद्यालय में आज छात्र-छात्राओं के लिए वह सब सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो एक अच्छे निजी स्कूल में होती हैं। इसी वजह से 227 छात्र-छात्राओं वाले इस विद्यालय की छात्र संख्या हर साल बढ़ रही है। शिक्षकों के अनुसार पिछले दो वर्षों में करीब 50 उन छात्र-छात्राओं ने उनके स्कूल में प्रवेश लिया, जो पहले निजी स्कूल में पढ़ते थे।

किए ये सुंदर बदलाव

गंभीर सिंह ने खुद के प्रयासों से सभी कक्षों में रंगाई-पुताई, ग्रीन बोर्ड और नोटिस बोर्ड लगाए हैं। सुबह की प्रार्थना व अन्य आयोजनों के लिए साउंड सिस्टम और वाद्ययंत्र खरीदें हैं। इसके अलावा तीन वाटर फिल्टर, जैविक-अजैविक कूड़े के लिए अलग-अलग कूड़ेदान, खेल सामग्री, कंप्यूटर और फर्नीचर की व्यवस्था की है।

विद्यालय की चहारदीवारी को उपयोगी और सुंदर बनाते हुए इस पर शिक्षा से जुड़े सुंदर चित्र बनवाए हैं। विद्यालय भवन सड़क के नीचे होने के कारण इसमें हर साल बरसात का पानी भर जाता था। इससे निजात दिलाने के लिए उन्होंने ग्राम प्रधान के सहयोग से सोक पिट तैयार करवाए। अब स्कूल परिसर में पानी नहीं भरता। बल्कि बारिश के पानी का संरक्षण कर उपयोग में लाया जाता है। 
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16 साल की कड़ी मेहनत के बाद बच्चों के लिए जुटाई सभी सुविधाएं 

कोटद्वार में नैनीडांडा ब्लाक के राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुस्याखांद के शिक्षक गबर सिंह बिष्ट ने दुर्गम क्षेत्र के विद्यालय में शिक्षा की अलख जगाई है। बृहस्पतिवार को उन्हें देहरादून में प्रदेश की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य द्वारा सम्मानित किया जाएगा। शिक्षक गबर सिंह बिष्ट पिछले 16 साल से दुर्गम क्षेत्र के इस विद्यालय में कार्यरत हैं। विद्यालय में शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए उन्होंने अनेक कार्य किए हैं। उन्होंने अपने प्रयास से विद्यालय भवन के लिए विधायक निधि से 25 लाख जुटाए। जिला पंचायत से भी बजट की व्यवस्था कराई।
 
वर्तमान में विद्यालय का नवनिर्मित भवन है। भवन में प्राइवेट स्कूलों की तरह सभी बच्चों के बैठने के लिए उचित व्यवस्था है। विद्यालय में पीने का स्वच्छ पानी, आधुनिक शौचालय, पंखे, इन्वर्टर, कंप्यूटर और प्रोजेक्टर जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध है। शिक्षक ने प्रोजेक्टर के माध्यम से बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार शिक्षा देने और उनकी कमियों को तलाशने के बाद बच्चों के मानसिक स्तर पर जाकर शिक्षा देने का कार्य किया है।
शिक्षक की मेहनत की बदौलत विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सामान्य ज्ञान, निबंध आदि राज्य स्तर की कई शैक्षणिक प्रतियोगिताओं में अव्वल प्रदर्शन किया। इसी आधार पर उनका चयन गर्वनर्स टीचर्स अवार्ड 2019-20 के लिए किया गया। शिक्षक बिष्ट ने बताया कि नैनीडांडा ब्लाक के दुर्गम क्षेत्र का यह उनके गांव का विद्यालय है। अपने गांव में एक आदर्श विद्यालय बनाने का उनका सपना था। वर्ष 2003 में उन्होंने अपनी इच्छा के अनुसार विद्यालय में पोस्टिंग ली और विद्यालय के जीणोद्धार में जुट गए। इस अवार्ड से अब उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए वे निरंतर कार्य करते रहेंगे।
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