ये सातों ऋषि धरती के पहले शिक्षक थे। देश भर के राजकुमारों सहित साधरण जनता इन ऋषियों से पढ़ने आती थी। कुंभ आदि मेलों पर हिमालयों की गुफाओं से ऋषि-मुनि अपना सृजित ज्ञान समाज को बांटने इसी धरती पर आते थे। आज भी कुंभ मेलों पर विशाल दीक्षा समारोह धर्मनगरी में आयोजित किए जाते हैं। यह नगरी वैदिक कर्मकांड का भी बड़ केंद्र रही है।
आज भी हरिद्वार में संस्कृत शिक्षा प्रदान करने वाले 28 विद्यालय और महाविद्यालय मौजूद हैं। संस्कृत विश्वविद्यालय और संस्कृत अकादमी के अलावा प्राच्य विद्याओं से जुड़े गुरुकुल और पतंजलि विश्वविद्यालय यहीं हैं। कर्मकांड शिक्षा का बड़ा केंद्र ऋषिकुल विद्यापीठ के रूप में स्थापित है तो कर्मकांड की शिक्षा देने के लिए 12 कर्मकांड वेद विद्यालय चल रहे हैं। ऋषियों की यह अनादि भूमि आरंभ से ही शिक्षा का प्रचार करती रही है।