कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो। इसी शायरी को आधार बनाकर इस शिक्षक ने अपने छात्र के लिए वो काम कर दिखाया जो किसी ने सोचा भी नहीं होगा। बेहद गरीब और मानसिक रूप से कमजोर छात्र को एक शिक्षक ने संवार कर विश्व विजेता बना दिया।
शिक्षक ने न केवल छात्र को कोचिंग दी बल्कि उसके खेल को आगे बढ़ाने के लिए अपनी तनख्वाह तक लगा दी। छात्र ने भी निराश नहीं किया और शिक्षक की उम्मीदों से कई गुना बेहतर प्रदर्शन कर अमेरिका में देश के लिए गोल्ड मेडल जीता। हालांकि देश को स्वर्णिम सफलता दिलाने वाले टीचर को शिक्षा विभाग ने एक प्रशस्ति पत्र तक देना गंवारा नहीं किया।
यह मिसाल टिहरी गढ़वाल के राजकीय इंटर कॉलेज खोला कड़ाकोट, कीर्तिनगर के शिक्षक सतीश बलूनी से जुड़ी है। 2010-11 में मानसिक रूप से कमजोर छात्र विजय सिंह ने स्कूल में प्रवेश लिया। उसकी कद-काठी और खेलों के प्रति लगाव को देखते हुए शिक्षक सतीश बलूनी ने नियमित अभ्यास के लिए प्रोत्साहित किया। गरीब विजय के पास अभ्यास के लिए जूते तक नहीं थे।
तब सतीश ने उसे जूते दिलाए और कोचिंग दी। वह अपने खर्च पर विजय को अलग-अलग स्तरों पर होने वाली खेत प्रतियोगिताओं में हिस्सा दिलाने के लिए खुद लेकर जाते। युवा कल्याण और खेल मंत्रालय की ओर से 2013 में अजमेर, राजस्थान में आयोजित नेशनल मयास गेम्स में विजय ने 400 मीटर दौड़ में देशभर में दूसरा स्थान हासिल किया।