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Uttarakhand: अटल उत्कृष्ट स्कूलाें पर शिक्षक संगठनों की नहीं एकराय, फिर से उत्तराखंड बोर्ड लागू करने की इच्छा

Sun, 06 Aug 2023 12:49 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

प्रांतीय कार्यकारिणी की पिछले दिनों हुई बैठक में संगठन की ओर से बताया गया कि सभी जिलों ने इन स्कूलों को फिर से उत्तराखंड बोर्ड में शामिल करने की मांग की है। संगठन की इस मांग के बाद शिक्षा मंत्री डा.धन सिंह रावत ने भी इस मसले पर सबकी राय के बाद आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
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विस्तार
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प्रदेश के 189 अटल उत्कृष्ट स्कूलों की सीबीएसई से संबद्धता समाप्त कर इन्हें फिर से उत्तराखंड बोर्ड में शामिल किए जाने को लेकर शिक्षक संगठन पदाधिकारी एकराय नहीं हैं। कुछ चाहते हैं इन स्कूलों को फिर से उत्तराखंड बोर्ड में शामिल किया जाए तो कुछ ने इसका विरोध किया है।

राजकीय शिक्षक संगठन की प्रांतीय कार्यकारिणी की पिछले दिनों हुई बैठक में संगठन की ओर से बताया गया कि सभी जिलों ने इन स्कूलों को फिर से उत्तराखंड बोर्ड में शामिल करने की मांग की है। संगठन की इस मांग के बाद शिक्षा मंत्री डा.धन सिंह रावत ने भी इस मसले पर सबकी राय के बाद आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन अब संगठन से जुड़े कुछ पदाधिकारियों ने इन स्कूलों की सीबीएसई से संबद्धता समाप्त करने का विरोध किया है। जीआईसी बरोटीवाला की शाखा अध्यक्ष रश्मि नेगी ने संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा स्कूलों की सीबीएसई की संबद्धता समाप्त करना ठीक नहीं है।

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छात्र संख्या में वृद्धि हुई
घनानंद इंटर कालेज मसूरी की शाखा कार्यकारिणी ने संगठन के जिला अध्यक्ष और मंत्री को लिखे पत्र में कहा स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध करने के बाद स्कूल में छात्र संख्या में वृद्धि हुई है। जो बच्चे अधिक फीस देकर निजी स्कूलों में पढ़ रहे थे, उन्हें सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई का अच्छा अवसर मिला है।

इन स्कूलों के छात्रों और अभिभावकों की भावना को समझते हुए इन स्कूलों की सीबीएसई से संबद्धता समाप्त न की जाए। अटल उत्कृष्ट जीआईसी लांघा और बरोटीवाला ने भी इस संबंध में जिला कार्यकारिणी को पत्र लिखा है। शिक्षक संगठन पदाधिकारियों का कहना है, इस मसले पर विभागीय अधिकारियों और मंत्री से बात की जाएगी।

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उन्होंने कहा इन स्कूलों की शुरुआत करने में शिक्षकों, प्रधानाचार्य और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बहुत प्रयास किया था। यदि इन स्कूलों की सीबीएसई से संबद्धता समाप्त कर दी गई तो जिन अभिभावकों ने अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों से हटवाकर इन सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाया उन बच्चों के भविष्य का क्या होगा।

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