पहाड़ के स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी ने चिंता जताई है। शिक्षा विभाग में सत्र 2013-14 में हुए तबादले के आंकड़े बताते हैं कि उनकी यह चिंता वाजिब है।
अस्सी फीसदी तबादले सुगम क्षेत्रों में
इस सत्र में प्रदेश भर में अब तक 3521 तबादले किए जा चुके हैं, जिनमें से 2057 शिक्षक अनुरोध के आधार पर स्थानांतरित किए गए। हैरानी की बात यह है कि इनमें से करीब अस्सी फीसदी तबादले सुगम क्षेत्रों में हुए हैं।
जिन शिक्षकों को पहाड़ भेजा गया, उन्होंने बीमारी के नाम पर तबादले संशोधित करा लिए और फिर सुगम स्कूलों में पहुंच गए। राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में 15-20 साल से सुगम विद्यालयों में जमे शिक्षकों को पहाड़ चढ़ाने और दूरस्थ क्षेत्रों के शिक्षकों को सुगम में लाने की मंशा से प्रथम नियुक्ति, पदोन्नति एवं स्थानांतरण नियमावली तैयार की गई थी।
लेकिन विभाग में इस नियमावली की ही धज्जियां उड़ने लगीं। दून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल सहित तमाम सुगम क्षेत्रों में तो शिक्षक पहुंच गए, लेकिन पहाड़ी जिलों में स्थानांतरित शिक्षक वहां गए ही नहीं। गढ़वाल मंडल में प्रारंभिक शिक्षा में सुगम से दुर्गम में 296 शिक्षकों के अनिवार्य तबादले किए गए, जिनमें से 23 ने अब तक ज्वाइनिंग नहीं ली।
माध्यमिक में भी एक शिक्षक ने पहाड़ पर तैनाती नहीं ली है। दूसरी ओर, कुमाऊं मंडल में ऐसे शिक्षकों की संख्या 12 है। दूसरी ओर, पहाड़ से सुगम स्थलों पर भेजे गए 575 शिक्षक सितंबर में ही नए स्कूलों में ज्वाइन कर चुके हैं।
अनुरोध ने पहुंचाया सुगम
प्रदेश में अनुरोध के आधार पर तबादलों की भरमार रही। 31 दिसंबर तक शिक्षकों के तबादले होने थे। 15 नवंबर तक 291 शिक्षकों के तबादले हुए। इसके बाद तारीख 15 फरवरी तक बढ़ाई गई। इस बीच 1399 शिक्षकों के अनुरोध के आधार पर तबादले किए गए।
अब भी न थमता सिलसिला
विभागीय सूत्र बताते हैं कि चुनाव आचार संहिता न लगती तो करीब 300 और शिक्षक देहरादून और अन्य सुगम क्षेत्रों में तैनाती पा लेते। खास बात यह है कि 1399 तबादले सिर्फ तीन महीने की अवधि में हुए हैं। इनके अलावा कुछ गुपचुप तरीके से किए गए। इसमें गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में प्रारंभिक के 1600 और माध्यमिक के 1921 शिक्षकों के तबादले हुए हैं।
प्रमोशन पाकर भी पहुंचे सुगम में
नियमावली के तहत शिक्षकों को प्रमोशन मिलने पर दुर्गम विद्यालयों में तैनात किया जाता है। लेकिन इस नियम की भी अनदेखी की गई। पहली बार एलटी से प्रवक्ता पद पर पदोन्नत लगभग 60 शिक्षिकाओं के तबादले सुगम विद्यालयों में किए गए।
बगैर नियमावली के हुए तबादलों का राजकीय शिक्षक संघ विरोध करता है। इस तरह के तबादलों को सरकार तुरंत निरस्त करे।
करनैल सिंह, प्रांतीय अध्यक्ष, राजकीय शिक्षक संघ