उत्तराखंड में एक ओर जहां नेताओं की पत्नियां मनचाही जगहों पर तबादला करवा ले रही, वहीं सैनिक की विधवा की कोई सुध लेने वाला नहीं है।
विभिन्न दुर्गम विद्यालयों में तैनाती
यह हाल तब है जबकि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रमुख सचिव शिक्षा को सैनिक की विधवा पत्नी के तबादले के आदेश दिए हैं। राजकीय इंटर कॉलेज लोहाली नैनीताल में बतौर सहायक अध्यापिका (संस्कृत) शांति मल्ल वर्ष 2006 से प्रदेश के विभिन्न दुर्गम विद्यालयों में तैनात रही हैं।
वर्ष 2000 में उनके पति हरि सिंह के निधन के बाद परिवार की देखरेख का जिम्मा उन पर है। लेकिन दुर्गम में लंबी सेवा के बावजूद उनका स्थानांतरण सुगम विद्यालय में नहीं हो पा रहा। जबकि तबादला नियमावली में विधवा शिक्षिकाओं के लिए तबादलों में छूट का प्रावधान है। हैरानी की बात यह है कि मुख्यमंत्री ने भी विशेष परिस्थितियों को देखते हुए शिक्षिका के तबादले के आदेश दिए हैं। शिक्षिका मूल रूप से दून जनपद की निवासी है।
कब आएगा शासनादेश
नई स्थानांतरण नियमावली में सैनिक की पत्नियों को तबादलों में छूट दी गई है। नियमावली को विचलन से मुख्यमंत्री मंजूरी दे चुके हैं, लेकिन शासनादेश अभी नहीं आया है। इसका शासनादेश हो तो प्रदेश में पहली बार सैनिक की पत्नी शिक्षिकाओं को लाभ मिल सकेगा।
मेरे पति की उनके सेवाकाल के दौरान ही वर्ष 2000 में मौत हो चुकी है। पुत्री बीमार है, जिसका अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली में उपचार चल रहा है। विभाग में सेवा के साथ ही बीमार पुत्री का उपचार करा सकूं इसके लिए राजकीय इंटर कालेज लोहाली नैनीताल से घनानंद राजकीय इंटर कालेज मसूरी में तबादला चाहती हूं।
- शांति मल्ल, शिक्षिका
विधवा शिक्षिका के स्थानांतरण का प्रकरण दिखाया जाएगा। नियमावली में विधवा शिक्षिकाएं तबादलों के लिए पात्र हैं। उनका तबादला हो जाना चाहिए।
- एस राजू, अपर मुख्य सचिव