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स्कूलों में सन्नाटा, दबाव में सरकार, नए सिरे से होगी बात

Tue, 13 Sep 2016 08:50 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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चयन और प्रोन्नत वेतनमान पर एक अतिरिक्त वेतनवृद्धि, बीआरसी-सीआरसी की नियुक्ति और तीन ईएल सहित 20 सूत्री मांगों पर सोमवार से उत्तराखंड के 2300 स्कूलों के 25 हजार शिक्षक हड़ताल पर चले गए। इससे सरकार दबाव में आ गई और शाम को राजकीय शिक्षक संघ को सीएम ने वार्ता के लिए बुलाया। खबर लिखे जाने तक सीएम और शिक्षकों के बीच वार्ता जारी थी।
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प्रदेश के 95 ब्लॉक के 2300 स्कूलों के शिक्षकों ने सोमवार से हड़ताल शुरू कर दी। शिक्षक अपने-अपने ब्लॉक में धरने पर बैठे। शिक्षा निदेशालय में राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम सिंह चौहान और गढ़वाल मंडल मंत्री शिव सिंह नेगी का आमरण अनशन सोमवार को भी जारी रहा। इस बीच नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रकाश पंत भी शिक्षक आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे। 

जब तक सरकार हमारी मांगों पर शासनादेश जारी नहीं करेगी, तब तक प्रदेशभर में शिक्षकों की हड़ताल और आमरण अनशन जारी रहेगा। इसके अलावा किसी भी विकल्प पर हड़ताल वापस नहीं होगी। 
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- राम सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष, राजकीय शिक्षक संघ

राजनीति हुई तेज
शिक्षकों के आंदोलन पर राजनीति तेज हो गई है। रविवार को पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत, पूर्व विधायक उमेश शर्मा काऊ के निदेशालय में शिक्षकों के अनशन पर पहुंचने के बाद सोमवार को नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रकाश पंत भी शिक्षकों के बीच पहुंचे। अजय भट्ट ने तो यहां तक कह दिया कि अगर शिक्षक कहें तो कल से वे भी उनके साथ बैठ जाएंगे। इसके अलावा प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चौहान ने भी शिक्षकों को समर्थन दिया।

शिक्षकों की मांगें
- वार्षिक स्थानांतरण किए जाएं। स्थानांतरण के लिए पारदर्शी एक्ट या स्पष्ट चक्रवार स्थानांतरण नीति तैयार की जाए। आठ जुलाई को संगठन द्वारा दिए गए सुझावों को सम्मिलित करते हुए स्थानांतरण नियमावली में संशोधन किया जाए।
- सीएम द्वारा अनुमोदित तीन उपार्जित अवकाशों व यात्रा अवकाश का शासनादेश जारी किया जाए।
- बीआरपी/सीआरपी के पदों में चयनित शिक्षकों को शीघ्र पदस्थापित किया जाए।
- एलटी शिक्षकों का चयन वेतनमान 4800 की जगह 5400 किया जाए और एलटी को प्रोन्नत वेतन बैंड 3 में रखा जाए। प्रवक्ता का प्रारंभिक ग्रेड पे 5400 किया जाए।
- शारीरिक शिक्षा को विषय के रूप में पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। 12वीं के स्तर पर प्रवक्ता शारीरिक शिक्षा के पद सृजित किए जाएं।
- बेसिक से एलटी में समायोजित शिक्षकों को पूर्व सेवा का लाभ देते हुए चयन/प्रोन्नत वेतनमान में आर्थिक लाभ दिया जाए।
- कोटद्वार विधानसभा चुनाव के कारण कार्यभार ग्रहण न कर पाने वाले शिक्षकों और एक ही विज्ञप्ति द्वारा चयनित शिक्षकों को पुरानी पेंशन सुविधा का लाभ दिया जाए।
- वर्ष 1990 के बाद तदर्थ रूप से नियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता प्रदान की जाए।
- सीटी कैडर मृत्यु घोषित होने के बाद एलटी में संविलियन हेतु शिक्षकों की वरिष्ठता को ठीक किया जाए।
- सभी संवर्गों के लिए स्पष्ट पदोन्नति नीति तैयार की जाए। प्रत्येक शैक्षिक सत्र के प्रारंभ (अप्रैल माह) पदोन्नति सूची जारी की जाए।
- पीएचडी धारक माध्यमिक शिक्षकों को उनकी योग्यता के मुताबिक उच्च शिक्षा में पदोन्नति या समायोजित किया जाए।
- शिक्षकों को कृपांक का लाभ दिया जाए।
- परिषदीय परीक्षा में मूल्यांकन में मानवीन भूल से हुई त्रुटि में वेतनवृद्धि रोकने का निर्णय वापस लिया जाए और बिना जांच किए शिक्षकों के किसी भी प्रकरण पर दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
- शिक्षिकाओं को उनके द्वारा नियमानुसार सीसीएल हेतु आवेदन करने पर 15 दिनों की सीसीएल प्रधानाचार्यों के अग्रसारण के साथ ही उपभोग की अनुमति मान ली जाए।
- उत्तर प्रदेश विकल्पधारी शिक्षकों को मूल प्रदेश जाने हेतु पर्वतीय उपसंवर्ग में नियुक्ति का प्रतिबंध हटाया जाए और स्वेच्छा से यूपी जाने वाले शिक्षकों को एकमुश्त कार्यमुक्त किया जाए।
- विद्यालयों का कोटिकरण वर्तमान स्थिति के अनुसार न होकर वर्ष 2008 को कटऑफ डेट मानते हुए शिक्षकों के गुणांकों की गणना उनकी पुरानी सेवा को दृष्टिगत रखते हुए तत्समय विद्यालय की स्थिति के अनुरूप किया जाए। 
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