राजधानी के शिक्षक बदलते वक्त के साथ चलकर छात्रों का भविष्य उज्ज्वल कर रहे हैं।
ये शिक्षक समाज और पर्यावरण की बदलती चुनौतियों के हिसाब से आगे बढ़कर अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। वह न केवल पर्यावरण के प्रति संवेदनशील दिखे, बल्कि समाज के प्रति भी बेहद गंभीरतापूर्वक अपने ज्ञान का प्रयोग किया।
गमले से जोड़ी शिक्षा
जीआईसी सेलाकुई के शिक्षक पवन कुमार शर्मा ने शिक्षा को गमले से जोड़ने का काम किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर ‘अपना गमला, अपना स्कूल’ कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज स्तर पर की।
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उनका यह कार्यक्रम शिक्षा विभाग को इतना पसंद आया कि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने यह कार्यक्रम पूरे ब्लॉक में लागू कर दिया। शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम के तहत छात्रों का एक समूह बनाया जाता है। यह समूह स्कूल में एक गमले में एक पौधा लगाता है।
एडमीशन से लेकर वार्षिक परीक्षा तक छात्र गमले की देखभाल करते हैं। इंटरनल परीक्षा के वक्त जिस समूह का गमला सबसे बेहतर होता है, उसे अच्छे अंक दिए जाते हैं।
किताबों से बाहर निकाले पेड़
बच्चे जिन पेड़ों को किताबों में पढ़कर रटते हैं, वह आंखों के सामने दिखे तो छात्र उसे बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। इकोमैन कहे जाने वाले लक्ष्मण विद्यालय के शिक्षक एमएस मेहता ने कुछ ऐसा ही किया। वह विद्यालय परिसर में ही 40 से ज्यादा मेडिसिनल प्लांट लगा चुके हैं।
छात्रों को किताब में पढ़ाने के बाद फील्ड में इन पौधों की जानकारी दी जाती है। यही नहीं, बच्चों तक विज्ञान पहुंचाने के लिए वह अपने खर्च पर बाल पत्रिका भी निकालते हैं। मेहता बताते हैं कि उन्होंने छात्रों की मदद से सबसे पहले दून में इको दीवाली की मुहिम शुरू की, जिसका अच्छा असर दिखा।
वह कहते हैं पर्यावरण की चिंता बच्चों में पैदा करना जरूरी है, तभी भविष्य सुरक्षित रह सकता है।
गरीब बच्चों को कोचिंग
दिनभर कक्षा में बच्चों को पढ़ाने के बाद जब सभी शिक्षक घर भागते हैं, अवधेश कौशिक गरीब बच्चों को कोचिंग देने निकल पड़ते हैं। गांधी इंटर कॉलेज के प्राचार्य कौशिक का नाम बाल वनिता आश्रम के अनाथ बच्चों के बीच बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है।
इसके अलावा स्कूल की कंप्यूटर लैब में भी कौशिक बच्चों को खास प्रशिक्षण देते हैं। आज गरीब बच्चों की आधुनिक शिक्षा में वह अलग पहचान बन चुके हैं। उन्होंने बताया कि अपने अध्ययन काल से ही वह गरीब तबके के लिए कुछ करना चाहते थे, मौका मिला तो जुट गए। अब तो यह जिंदगी का हिस्सा बन गया है।
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