शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करके उत्तराखंड का मान बढ़ाने वाले 49 शिक्षकों को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शैलेश मटियानी पुरस्कार से सम्मानित किया।
इस मौके पर सीएम ने कहा कि सरकारी शिक्षकों को शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए अग्रणी भूमिका निभानी होगी।
रायपुर ब्लॉक के सौडा सिरोली में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए बहुआयामी प्रयासों की आवश्यकता है।
सरकार के साथ निजी क्षेत्र को भी इन प्रयासों में शामिल करना होगा। कहा कि हमारी प्रति व्यक्ति आय अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है और राज्य का विकास भी हुआ है, लेकिन विकास एकांकी नहीं, समावेशी होना चाहिए।
स्वस्थ राज्य के निर्माण के लिए हमें प्रदेश के उन 20 लाख लोगों को प्राथमिकता देनी होगी, जिन्हें बेहतर शिक्षा, चिकित्सा, पेयजल नहीं मिल पा रहा है। इससे पूर्व सीएम ने धर्मा इंटरनेशनल स्कूल का औपचारिक उद्घाटन किया। समारोह में शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी, विधायक हीरा सिंह बिष्ट, शिक्षा महानिदेशक डी सैंथिल पांडियन आदि मौजूद थे।
विधायक पांच तो सरकार तीन लाख देगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों में फर्नीचर एवं अन्य सुविधाओं के लिए विधायक अपनी विधायक निधि से पांच लाख रुपए देते हैं तो राज्य सरकार अतिरिक्त तीन लाख रुपए की राशि उपलब्ध कराएगी।
यह शिक्षक हुए पुरस्कृत
राज्य शैक्षिक शैलेश मटियानी पुरस्कार से वर्ष 2012 के चयनित जिन शिक्षकों को पुरस्कृत किया गया, उनमें बेसिक के शिक्षकों में पौड़ी से कलावती रावत, चमोली की उर्मिला फरस्वाण, दून के वीरेंद्र सिंह कृषाली, टिहरी के राजेंद्र प्रसाद बहुगुणा, हरिद्वार से नसीम अख्तर अंसारी, उत्तरकाशी से वीरपाल सिंह, चंपावत से बीना जोशी, नैनीताल से सुरेश चंद्र सुयाल, पिथौरागढ़ से प्रमिला वल्दिया, अल्मोड़ा से आशा भट्ट शामिल हैं।
माध्यमिक के शिक्षकों में पौड़ी से रतनमणि भट्ट, चमोली से दिगपाल रावत, उत्तरकाशी से रामआसरे सिंह, दून से जसपाल सिंह नेगी, टिहरी से छन्नी लाल सचान, रुद्रप्रयाग से दिनेश प्रसाद सेमवाल, बागेश्वर से गोविंद प्रसाद कुनियाल, ऊधमसिंह नगर से प्रकाश चंद्र पाठक, नैनीताल से डॉ. भारती नारायण भट्ट, पिथौरागढ़ से नंदा रावत, अल्मोड़ा से चंद्रकांत तिवारी, तकनीकी शिक्षा के लिए बागेश्वर से डॉ. केवलानंद कांडपाल, संस्कृत शिक्षा के लिए चंपावत देवीधुरा के भुवन चंद्र जोशी को पुरस्कृत किया गया।
वर्ष 2013 के यह शिक्षक हुए पुरस्कृत
प्रारंभिक शिक्षा में पौड़ी से लक्ष्मी नैथानी, रुद्रप्रयाग से गंगा देवी, उत्तरकाशी से नंदा सिंह, दून से स्नेहलता चमोली, चमोली से विनोद चंद, टिहरी से देवीप्रसाद, अल्मोड़ा से इंद्रा तेवाड़ी, बागेश्वर से दुर्गालाल, चंपावत से डॉ. लक्ष्मी गहतोड़ी, नैनीताल से गोपाल सिंह बिष्ट, पिथौरागढ़ से कुमारी मीना थापा को पुरस्कृत किया गया।
वहीं माध्यमिक शिक्षा में पौड़ी से विमला भंडारी, रुद्रप्रयाग से शिव सिंह रावत, उत्तरकाशी से डॉ. यशोदा प्रसाद, दून से दिवाकर भानू प्रताप सिंह, चमोली से खुशाल सिंह गुसांई, टिहरी से परिपूर्णानंद सकलानी, हरिद्वार से राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, अल्मोड़ा से महेश चंद्र जोशी, बागेश्वर से राजीव निगम, चंपावत से उमेद सिंह बिष्ट, नैनीताल से वीरेंद्र सिंह बिष्ट, पिथौरागढ़ से बसंती मर्तोलिया, ऊधमसिंह नगर से महेंद्र प्रताप पांडे, तकनीकी शिक्षा के लिए टिहरी से मीनाक्षी को पुरस्कृत किया गया।
हर साल हर जिले में पुरस्कृत होंगे शिक्षक: नैथानी
शिक्षक दिवस पर हर साल जनपद मुख्यालयों में राज्य एवं राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। यह कहना है शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी का। वह रायपुर ब्लॉक के सौड़ा सिरोली में बतौर विशिष्ट अतिथि शिक्षकों को पुरस्कृत कर रहे थे।
शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने दून जिले के शिक्षकों को पुरस्कृत करते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षकों की कमी को दूर किया जाएगा। इसके लिए गेस्ट टीचरों की व्यवस्था की गई है। वहीं तबादलों से भी दूरदराज के स्कूलों में शिक्षकों को भेजा गया है।
स्कूलों में संसाधनों की कमी पर उन्होंने कहा कि इसमें सहयोग के लिए सभी को आगे आना चाहिए। समारोह में शिक्षा निदेशक आरके कुंवर, सीमा जौनसारी, सीईओ एसपी खाली आदि मौजूद थे।
राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त यह शिक्षक भी पुरस्कृत
अपर शिक्षा निदेशक गीता नौटियाल, प्रधानाचार्य सुरेंद्र सिंह बिष्ट, रश्मि कुलश्रेष्ठ, मधु कुलश्रेष्ठ, भीमदत्त बहुगुणा, एनएस ध्यानी, बेनी प्रकाश पुष्पकार, अवधेश कौशिक, कमलेश्वर प्रसाद भट्ट, रामेश्वर प्रसाद बमोला, आरपी सिंह, राकेश काला, रमेश बडोनी को पुरस्कृत किया गया।
वहीं बेसिक के शिक्षकों में दिग्विजय चौहान, सुभाष चौहान, सरस्वती, कुसुम, राजेश्वरी भंडारी, आभा गौड़, दिनेश्वरी नेगी, स्नेह लता चमोली, कुसुम, यासीन मोहम्मद को पुरस्कृत किया गया।