हाल ही में दो बार संशोधित होने के बाद उत्तराखंड की खनन नियमावली में एक बार फिर संशोधन होने जा रहा है।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शनिवार को रायपुर में आयोजित गाय-गंगा योजना कार्यक्रम में कहा कि वह नियमावली में जरूरी बदलाव के लिए आदेश कर चुके हैं।
माना जा रहा है कि इससे छोटे स्तर पर खनिज का भंडारण करने वाले कारोबारियों को राहत मिलेगी। पिछली बार संशोधन के बाद छोटे स्तर पर कारोबार करने वाले हजारों लोग प्रभावित हुए थे।
अवैध खनन पर मच रहे हो-हल्ले के बाद सरकार ने जुलाई और अगस्त महीने में खनन नियमावली को संशोधित किया था। 31 जुलाई को जारी संशोधित नियमावली के मुताबिक खनिज भंडारण के लिए वही लोग आवेदन कर सकेंगे, जिनके पास स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट, पल्वराईजर एवं खनन का पट्टा हो।
लाइसेंस भी जिला अधिकारी के बजाय केवल शासन स्तर से ही जारी किया जा सकेगा। इस संशोधन का असर यह हुआ कि छोटे स्तर पर खनन का कारोबार अवैध हो गया था। इससे हजारों लोगों का रोजगार छिन गया था। क्योंकि जिनके पास स्टोन क्रशर, खनन के पट्टे नहीं हैं, उन्हें भंडारण का लाइसेंस ही नहीं मिल रहा है।
इसके अलावा खनिज भंडारण के लाइसेंस के लिए आवेदन की धनराशि को तीन हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये किया गया था। स्टोन क्रशर प्लांट, मोबाइल स्टोन क्रशर, उपखनिजों पर रायल्टी और अवैध खनन पर जुर्माने की धनराशि को भी संशोधित कर दिया गया था।
खनन की संशोधित नियमावली से प्रदेशभर में लाखों लोगों का काम छिन गया है। पूर्व में जिलाधिकारी इसका लाइसेंस जारी करते थे, उसी व्यवस्था को ही बहाल किया जाना चाहिए।
- उमेश शर्मा काऊ, कांग्रेस विधायक रायपुर