डिग्री पाते ही वह मास्टर जी बन गए। दूसरे गुरु जी तो इससे भी एक कदम आगे निकले। जिस साल वह हाईस्कूल में फेल हुए, उसी साल पास भी हो गए। एसआईटी प्रभारी अपर पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे ने इन अमान्य डिग्री वाले शिक्षक और शिक्षा मित्र के खिलाफ विभाग को कार्रवाई के लिए लिखा है। इससे पहले एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग अमान्य डिग्री से नौकरी पाने वाले चार शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा चुका है।
बेसिक शिक्षा विभाग के करीब सवा दौ सौ शिक्षकों और शिक्षा मित्रों के प्रमाणपत्रों का एसआईटी सत्यापन करा रही है। एक-एक कर फर्जी डिग्री की कहानी सामने आ रही है। शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक कालसी में तैनात शिक्षा मित्र मोहन सिंह ने 1990 में कैंट से हाईस्कूल किया था।
फिर करीब 16 साल बाद यानि 2006 में इंटर पास की डिग्री पाई। यह डिग्री भी विशारद की थी, जो हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग की थी। जांच में वह अमान्य पाई गई। इंटर की इस डिग्री के आधार पर मोहन सिंह ने श्रीनगर गढ़वाल यूनिवर्सिटी से बीए पास की।
दूसरा फर्जीवाड़ा भगवानपुर के शिक्षा जयेन्द्र का सामने आया है। जयेन्द्र ने बीएमएस इंटर कालेज से 1992-93 में हाईस्कूल पास की डिग्री विभाग को उपलब्ध कराई थी। सत्यापन में पता चला कि जयेंद्र ने इसी साल सहारनपुर के एक कालेज से हाईस्कूल की संस्थागत परीक्षा दी थी, जिसमें वह फेल हो गए थे।
बाद में मोहन सिंह ने इसी साल की हाईस्कूल पास की डिग्री तैयार करा ली। इसी डिग्री के आधार पर उन्होंने शिक्षक की नौकरी हासिल कर ली। एसआईटी प्रभारी और सीबीआईडी की अपर पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे ने शिक्षक और शिक्षा मित्र के खिलाफ कार्रवाई के लिए बेसिक शिक्षा विभाग को लिखा है।