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फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी कर रहा था शिक्षक, खुलासा होते ही बर्खास्त

Mon, 20 Nov 2017 11:03 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, रुद्रपुर
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Fraud
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फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षक को जिला शिक्षा अधिकारी ने बर्खास्त कर दिया है। आरोपी शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तैयारी है।
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आरोपी पहले भी बर्खास्त हो चुका था, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश पर तत्कालीन शिक्षा अधिकारी ने उसे अस्थायी बहाली दे दी थी। मूल रूप से ग्राम आदपुर तहसील बिसौली बदायूं (यूपी) निवासी श्रीराम ने 18 मार्च 2005 में शिक्षा विभाग में बतौर शिक्षक नियुक्ति पाई थी। वर्तमान में

वह जूनियर हाईस्कूल धीमरी गदरपुर में तैनात था। उसने दस्तावेज में रुद्रपुर तहसील से बनाया गया स्थायी और जाति प्रमाण पत्र लगाया था, लेकिन फर्जी होने की शिकायत का संज्ञान लेते हुए दिसंबर 2014 में तत्कालीन एसडीएम ने स्थायी प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया था।
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इसके खिलाफ श्रीराम ने हाइकोर्ट में अपील की तो कोर्ट के आदेश पर प्रमाण पत्रों की दोबारा जांच हुई, उसमें भी प्रमाण पत्र फर्जी पाए, लेकिन जब विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की तो मामला सूचना आयोग तक जा पहुंचा। इसके बाद 11 सितंबर 2015 को श्रीराम को निलंबित कर दिया गया था और 30 नवंबर 2015 को उसे बर्खास्त कर दिया गया था।

इसके खिलाफ श्रीराम ने हाइकोर्ट में फिर अपील की तो कोर्ट ने तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के शिक्षा विभाग को आदेश दिए। शिक्षा विभाग ने इस बीच मई 2016 में उसको अस्थायी बहाली दे दी थी। 19 मई 2016 को तहसीलदार किच्छा ने उसका जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया। इस पर श्रीराम 13 जून 2016 को फिर हाइकोर्ट चल गया।

हाइकोर्ट ने डीएम की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर प्रमाण पत्रों की जांच के आदेश दिए थे। जांच के बाद बीते 23 अक्तूबर को प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। उसके बाद 27 अक्तूबर को श्रीराम को निलंबित कर दिया गया और 15 दिन में स्पष्टीकरण मांगा था। जिला शिक्षाधिकारी बेसिक रवि मेहता ने बताया फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर शिक्षक श्रीराम को बर्खास्त कर दिया गया है।
 
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आरोपी पर दर्ज है धोखाधड़ी का मुकदमा

फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर बर्खास्त किए गए शिक्षक श्रीराम के खिलाफ गदरपुर थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज है। तत्कालीन उपशिक्षाधिकारी सुनीता नेगी ने 15 अक्तूबर 2016 को दी तहरीर में कहा था कि श्रीराम ने फर्जी जाति, आय प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल की है। पुलिस ने धारा 420 आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया था।

अफसरों से नजदीकियों का मिला फायदा
शिक्षा विभाग के अधिकारियों से श्रीराम और उसके परिचितों की नजदीकियां रही हैं। यही कारण रहा कि फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर उसका निलंबन तो हुआ लेकिन विभाग ने तब बर्खास्त करने की जहमत तक नहीं उठाई। जब मामला सूचना आयोग पहुंचा तब बर्खास्त किया गया।
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