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शिक्षक दंपति को नहीं सताएगा 'वनवास' का डर

Sun, 07 Dec 2014 09:57 AM IST
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
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एक ही क्षेत्र में नियुक्ति के लिए उत्तराखंड के शिक्षक दंपतियों को अब 12 साल तक वियोग नहीं सहना होगा।
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तबादला नियमावली संशोधित
संशोधित तबादला नियमावली के मुताबिक अब पति या पत्नी में से किसी एक के दुर्गम विद्यालय में तैनात होने पर दूसरा उसी श्रेणी के नजदीकी स्कूल में अपने संवर्ग में अनुरोध के आधार पर स्थानांतरण ले सकेगा। यह व्यवस्था शिक्षणेतर कर्मचारियों पर भी लागू होगी।

अब तक एक ही स्थान पर तबादलों के लिए पति और पत्नी को दुर्गम क्षेत्र के स्कूल में तैनाती के आधार पर निर्धारित सेवा गुणांक पूरे करने होते थे। इसके बाद ही वे एक दूसरे के स्कूल के पास तैनाती के लिए आवेदन कर सकते थे।
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इस व्यवस्था के तहत दोनों में से किसी एक को दुर्गम विद्यालय में कम से कम 12 साल, अति दुर्गम में आठ और विशिष्ट दुर्गम में छह साल की सेवा में से कोई एक सेवा पूरी करनी होती थी। यह अवधि पूरी होने से पहले शिक्षक-शिक्षिका स्थानांतरण के लिए आवेदन नहीं कर सकते थे।

तीन प्रतिशत तबादले कर सकेगी समिति
तबादला नियमावली में यह भी संशोधन किया गया है कि विशेष आकस्मिक, अप्रत्याशित प्रकरणों (जो इस नियमावली में आच्छादित नहीं हैं) पर शासन की उच्चस्तरीय समिति संवर्ग विशेष में हुए कुल तबादलों के के तीन प्रतिशत तबादलों की संस्तुति कर सकेगी।

प्रमुख सचिव शिक्षा की अध्यक्षता में गठित समिति में शिक्षा महानिदेशक, कार्मिक विभाग का प्रतिनिधि (अपर सचिव स्तर), चिकित्सा महानिदेशक, बेसिक, माध्यमिक और अकादमिक के तीनों निदेशक शामिल होंगे।
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नियमावली में इस संशोधन से नए शिक्षकों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। इसकी वजह यह है कि नए शिक्षकों में अधिकतर पति-पत्नी दोनों ही शिक्षक हैं। नई व्यवस्था के बाद दोनों एक ही ब्लॉक के विद्यालय में तबादला पा सकेंगे। यह अच्छी पहल है।
- सरदार सिंह चौहान, प्रांतीय महामंत्री राजकीय शिक्षक संघ
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