ट्रांसफर में देरी के कारण तबादलों के लिए बनाई गई समयसारिणी गड़बड़ा गई है। इससे उत्तराखंड के शिक्षक असमंजस में हैं।
उनका कहना है कि वे अनुरोध के आधार पर कब आवेदन करेंगे और गलत तबादलों पर सुनवाई कब होगी, कुछ स्पष्ट नहीं है। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष सुभाष चौहान ने कहा कि तबादले मई-जून तक हो जाने चाहिए थे, लेकिन अब तक ये नहीं हो पाया है।
प्रदेश में शिक्षकों के तबादलों के लिए शासन की ओर से संशोधित समय सारणी जारी की गई थी। इसके अनुसार 26 जून तक अनिवार्य और 30 जून तक अनुरोध के आधार पर तबादले होने थे। लेकिन इसके अनुरूप न तो अनिवार्य तबादले हुए न अनुरोध के आधार पर।
शिक्षकों का कहना है कि एक जुलाई को स्कूल खुलने से पहले सभी प्रक्रियाएं पूूरी होनी थी, लेकिन विभागीय अधिकारी सिफारिशी तबादलों में उलझकर रह गए हैं। यही वजह है कि अब तक अनिवार्य तबादलों सूची जारी नहीं हो पाई है। कहा कि अब स्कूल खुलने पर तबादलों से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी।
शिक्षकों को काउंसिलिंग के लिए एक और अवसर दिया गया है। इसके बाद शिक्षकों के अनिवार्य तबादले किए जाएंगे। इसके कुछ दिन बाद अनुरोध के आधार पर तबादले की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- राम कृष्ण उनियाल, अपर निदेशक गढ़वाल मंडल