सबकुछ दांव पर लगा दुनिया की शीर्ष सात चोटियां फतह करने का प्रण कर चुकी देहरादून की जुड़वा बहनों ने छह चोटियां फतह कर ली हैं।
‘बर्फीला तूफान, करीब 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हवाएं और इनके बीच सफर तय करने के लिए बेहद संकरी सिर्फ आधे फीट की पगडंडी।
चार जून को माउंट मेकिनली के आखिरी पड़ाव में बेहद विपरीत हालात में जो दस घंटे का सफर तय किया, वह हमें ताउम्र याद रहेगा।
इनमें भी वे छह घंटे तो जिंदगी भर सीख देते रहेंगे, जिनमें हम रास्ता भटक काफी दूर तक मौसम से जूझते रहे।’
उत्तरी अमेरिका की माउंट मेकिनली चोटी को फतह कर दून स्थित घर लौटी जुड़वां बहनों ताशी-नुंग्शी ने कुछ इस तरह अपना अनुभव बयां किया।
अमर उजाला से बातचीत में बहनों ने बताया कि 20237 फीट ऊंचे माउंट मेकिनली (देनाली) का सफर 17 मई को 5400 फीट ऊंचाई पर बने कहिल्तना बेस कैंप से शुरू हुआ।
बर्फीले तूफान के कारण एक हफ्ते तक कैंप में ही रहीं
7400 फीट ऊंचाई पर पहला कैंप लगा। यहां नुंग्शी की अंगुलियां ठंड से सुन्न पड़ गईं, जिसका असर अब भी नजर आता है।
दोनों बहनों ने बताया कि 8200 फीट पर दूसरा, 14300 फीट पर तीसरा और 17400 फीट पर चौथा कैंप लगा।
मिशन 29 मई को माउंट मेकिनली को फतह करना था, लेकिन बर्फीले तूफान के कारण एक हफ्ते तक कैंप में ही रहना पड़ा। इस दौरान खाना खत्म हो गया और दोनों में मानसिक तनाव भी बढ़ने लगा था।
नुंग्शी ने बताया कि टेंशन इस कदर हो गई कि दोनों बहनें रोने लगीं। तब उन्होंने सेटेलाइट फोन से मां अंजू मलिक को फोन किया।
मां ने हौसला बढ़ाया तो कदम फिर चोटी की ओर निकल गए। चार जून की सुबह 10.30 बजे कैंप से बर्फीले तूफान के बीच ही एक गाइड के साथ दोनों ने चढ़ाई शुरू की।
जेब्रा रॉक्स पर पहुंचने के बाद भटकीं रास्ता
ताशी-नुंग्शी ने बताया कि बीच में पड़ने वाला आटो बन नाम का हिस्सा डरावना रहा। यहां पांच मौतें हो चुकी हैं। इससे आगे जेब्रा रॉक्स पर पहुंचने के बाद दोनों रास्ता भटक गईं।
करीब छह घंटे बाद फुटबॉल फील्ड से चोटी दिखी, तब जाकर उन्हें राहत मिली। लेकिन इसके आगे नाइफ रिज बड़ी बाधा था।
यहां दोनों ओर खाई के बीच सिर्फ आधे फीट की पगडंडी पर किसी तरह कदम सरकाते-सरकाते दोनों बहनें आगे बढ़ीं।
करीब दस घंटे बिना खाए-पीए चलने के बाद शाम सात बजे दोनों बहनों ने चोटी फतह की। यहां से नीचे उतरने में उन्हें छह घंटे का वक्त लगा।
बेस कैंप से चोटी का पूरा सफर 210 किलोमीटर का रहा। खास बात यह है कि दोनों बहनों ने दुनिया की सात चोटियों के अभियान का छठा पड़ाव पार कर लिया है।
यही नहीं, माउंट मेकिनली पर पहले ही प्रयास में फतह करने का भी उन्होंने रिकार्ड बनाया है।
अब दिसंबर में मिशन टू फॉर सेवन अभियान की अंतिम मंजिल अंटार्कटिका का सफर शुरू होगा। इसे फतह करने के साथ ही दोनों नया वर्ल्ड रिकार्ड भी कायम कर लेंगी।
पहली बार बनाई आइस वॉल
ताशी-नुंग्शी ने बताया कि हैवी स्नो स्टोर्म से बचने के लिए उन्होंने अब तक के पर्वतारोहण अभियानों में कभी आइस वॉल (इग्लू, बर्फ का घर) नहीं बनाया था।
लेकिन माउंट मेकिनली में ऐसा करना पड़ा। बताया कि हर कैंप में आइस वॉल बनाना पड़ा। इसे बनाने में पांच से छह घंटे लगते थे।
बताया कि कैंप में बनाए आइस वॉल में एक हफ्ते तक रुकना पड़ा। वहां हर रोज दो से तीन घंटे वॉल की मरम्मत में लगे।
सब दांव पर था, कैसे लौट जातीं
एक हफ्ते तक बर्फीले तूफान में फसने के बाद ताशी-नुंग्शी का खाना खत्म हो गया था। दूसरे पर्वतारोहियों ने उन्हें लौटने के लिए कहा, लेकिन दोनों नहीं मानीं।
ताशी ने बताया कि माता-पिता ने पर्वतारोहण अभियान का उनका सपना पूरा करने के लिए काफी उधार लिया है। उनका सबकुछ दांव पर लगा था।
एक बार लौट जातीं तो फिर दोबारा अभियान शुरू करना आसान नहीं होता, दोबारा भारी रकम जुटानी पड़ती। बस यह सोचकर दोनों आगे बढ़ीं और फतह हासिल कर ली।
फिल्म का ऑफर, लेकिन किताब लिखना सपना
पर्वतारोहण में देश का मान बढ़ा रही दोनों जुड़वा बहनों को बॉलीवुड से भी फिल्म का आफर मिला है।
ताशी-नुंग्शी ने बताया कि ‘काई पो चे’ फिल्म की यूनिट उनसे संपर्क कर चुकी है, लेकिन उन्हें अभी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है।
दोनों बहनें दुनिया की सात शीर्ष चोटियों को फतह करने के अपने अनुभवों को किताब में ढालना चाहती हैं। इसके साथ ही वे उत्तराखंड में पर्वतारोहण का इंशरनेशनल इंस्टीट्यूट भी खोलना चाहती हैं।
22 की हुई दोनों बहनें
शनिवार को ताशी-नुंग्शी ने अपना जन्मदिन भी मनाया। दोनों बहनें शनिवार सुबह ही दून लौटी। इसके बाद परिजनों संग सादगी से सेलिब्रेट किया। दोनों बहनें अब 22 साल की हो गई हैं।
यह है मिशन 2 फॉर 7
माउंट एवरेस्ट (नेपाल), किलिमंजारो (दक्षिण अफ्रीका), एल्ब्रुस (यूरोप), अकांकागुआ(दक्षिण अमेरिका), कास्ट्रेंज पिरामिड (एशिया), माउंट मेकिनली (उत्तरी अमेरिका), बिनसन मेसेस (अंटार्कटिका)।
अंटार्कटिका को छोड़ बाकी सभी को ताशी-नुंग्शी फतह कर चुकी हैं। खास बात यह है कि सभी चोटियां जुड़वां बहनों ने पहले प्रयास में पार कीं।
-40 से +40 ने बढ़ाई दिक्कत
माउंट मेकिनली में माइनस 40 डिग्री तापमान में रहकर दून लौटी दोनों बहनों को अचानक प्लस 40 डिग्री तापमान से परेशानी हो रही है।
नुंग्शी ने बताया कि तापमान के लिहाज से शरीर को एडजस्ट होने में कुछ वक्त लगेगा। जरूरत पड़ने पर डॉक्टरी सलाह लेने की बात कही।
बेटियों को समर्पित है अभियान
ताशी-नुंग्शी का मिशन बेटियों को समर्पित है। ताशी ने बताया कि वे दुनिया को यह मैसेज देना चाहती हैं कि लड़कियां कमजोर नहीं हैं, वे कुछ भी कर सकती हैं।
बस उनको सपना पूरा करने के लिए प्रेरणा और सहयोग की जरूरत है।