नेपाल सीमा की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण टनकपुर-जौलजीबी मोटर मार्ग निर्माण के ठेका आवंटन विवाद में सीजेएम की अदालत के बाद अब आर्बिट्रेशन ने भी ठेकेदार के पक्ष में फैसला दिया है। ठेकेदार पर टेंडर में फर्जी दस्तावेज लगाने के आरोप को खारिज करते हुए आर्बिट्रेशन ने कार्यदायी विभाग लोनिवि को ठेकेदार को हर्जाने के तौर पर सात करोड़ सात लाख 64 हजार 696 रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं।
टनकपुर-जौलजीबी मोटर मार्ग के दूसरे पैकेज (चूका से रूपालीगाड़ तक का निर्माण) 24.40 किमी का टेंडर 123 करोड़ रुपये में ठेकेदार दलीप सिंह अधिकारी के नाम आवंटित हुआ था। इस दौरान ठेकेदार पर फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र सहित कई आरोप लगे। शासन स्तर की जांच के बाद 2017 में न सिर्फ यह टेंडर निरस्त कर दिया गया, बल्कि ठेकेदार के खिलाफ टनकपुर थाने में दो साल पहले आईपीसी की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत मुकदमा भी दर्ज कराया गया।
इस पर गत 13 फरवरी को सीजेएम चंपावत की अदालत ने आरोपी ठेकेदार दलीप सिंह अधिकारी पर लगी धारा 467, 468 और 471 को निरस्त कर दिया है। फैसले में आईपीसी की धारा 420 को अपराध का संज्ञान लेने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार मानते हुए बरकरार रखा और फिर 19 फरवरी को पुन: दिए फैसले में अदालत ने पुलिस की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों को अपर्याप्त मानते हुए धारा 420 को भी निरस्त कर दिया।
इस विवाद की सुनवाई आर्बिट्रेशन में भी चल रही थी। गत मंगलवार को आर्बिट्रेशन का भी फैसला आ गया है। मुख्य आर्बिट्रेटर (पंच) एके सिंघल, एके बिष्ट और पवन कुमार की तीन सदस्यीय टीम ने ठेकेदार दलीप सिंह अधिकारी के पक्ष में फैसला दिया। ठेकेदार पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए टीम ने पीआईयू लोनिवि को निरस्त किए गए टेंडर को बहाल करने और ठेकेदार को 7 करोड़ 7 लाख 64 हजार 696 रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में देने के आदेश दिए हैं।
रोड का निर्माण जल्द शुरू होगा या फिर लटकेगा सरकार पर निर्भर
अदालत और आर्बिट्रेशन के फैसले के बाद अब टनकपुर-जौलजीबी रोड के दूसरे पैकेज का निर्माण जल्द शुरू हो पाएगा या नहीं यह अब सरकार के अगले कदम पर निर्भर है। फैसले के खिलाफ यदि सरकार उच्च न्यायालय जाती है तो सामरिक महत्व के इस सड़क का निर्माण कुछ समय के लिए और लटक सकता है। इस बारे में पक्ष लेने को कार्यदायी विभाग पीआईयू लोनिवि के ईई राजेश कुमार पुनेठा को फोन किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।