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टैलेंट को स्पोर्ट्स कॉलेज में ‘नो एंट्री’

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देहरादून। खेल महाकुंभ एक ऐसा आयोजन है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएं भी निकलकर सामने आती हैं। लेकिन, युवा कल्याण विभाग इस टैलेंट को सहजकर रखने में अब तक नाकाम साबित होता आया है। युवा कल्याण विभाग विजेताओं को उच्च ट्रेनिंग के दावे तो करता है, लेकिन स्पोर्ट्स कॉलेज रायपुर के प्रवेश नियम ऐसे हैं कि विजेताओं को प्रवेश मिलना संभव ही नहीं है।
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दरअसल, खेल महाकुंभ में अभी तक अंडर-14, 17, 19 वर्ग में मुकाबले होते हैं। जबकि देहरादून के रायपुर स्थित महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में प्रवेश के लिए खिलाड़ियों की आयु 12 वर्ष होनी जरूरी है। जबकि खेल महाकुंभ में न्यूनतम आयु 14 वर्ष है। जिस कारण खेल महाकुंभ के विजेता आयु अधिक होने के कारण स्पोर्ट्स कॉलेज में प्रवेश में अपात्र ठहरा दिए जाते हैं। वहीं इन प्रतिभाओं के लिए विभाग ने कभी ट्रेनिंग कैंप लगाने तक की जहमत नहीं उठाई। नतीजा, इस महाकुंभ में सामने आई दूरस्थ क्षेत्रों की प्रतिभाएं दोबारा नजर ही नहीं आती। इस पर खेल मंत्री अरविंद पांडेय ने भी चिंता जताते हुए प्रतिभावान खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने के लिए आगामी खेल महाकुंभ में अंडर-12 वर्ग को शामिल करने की बात कही है।
इनसेट
युवा कल्याण और खेल विभाग में तालमेल की कमी
इस नियम की जटिलता के लिए युवा कल्याण और खेल विभाग में सामंजस्य की कमी मुख्य कारण रही है। क्योंकि यदि वास्तव में विभागों में तालमेल होता तो प्रतिभाओं के भविष्य को देखते हुए प्रवेश नियम में जटिलता दी जा सकती थी या प्रतियोगिता में अंडर-12 वर्ग को शामिल कर लिया जाता, ताकि प्रतिभाओं के साथ न्याय किया जा सकता।
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