जांच रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए ले रहे एआई का सहारा
चिकित्सक के अनुसार लोग जांच रिपोर्ट आते ही सबसे पहले एआई से अध्ययन करवाते हैं। एआई बिना भाैतिक जांच के आंकड़ों के आधार पर संभावित सभी बीमारियों के बारे में बताता है। उसके परिणाम इसलिए भी खतरनाक साबित हो सकते हैं क्योंकि एआई न तो मरीज का बीपी-शुगर देखता है और न ही उसके अन्य पैरामीटर्स।
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ऑपरेशन से पूर्व उसकी प्रक्रिया को पहले ही समझ रहे मरीज
विशेषज्ञ बताते हैं कि कई मरीज ऑपरेशन से पहले उन्हें बताते हैं कि ऑपरेशन के दौरान यह सब प्रक्रिया की जाएगी। तो वे भी हैरान हो जाते हैं। जब मरीज से पूछते हैं तो वह बताते हैं कि एआई से पूछा था। इसकी प्रक्रिया पहले ही जानकर लोगों के मन में ऑपरेशन के लिए डर भी पैदा हो सकता है। इससे वे पूरा इलाज न करवाने का भी फैसला ले सकते हैं जो उनकी जान के लिए खतरा पैदा कर सकता है।