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T20 के रोमांच के साथ ही अंतरराष्ट्रीय फलक पर छा जाएगा दून का नाम, शुरू हुआ महामुकाबला

Sun, 03 Jun 2018 08:08 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हल्द्वानी
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t20
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देहरादून के रायपुर स्थित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में रविवार को अफगानिस्तान और बांग्लादेश के बीच पहले टी-20 मैच के लिए टॉस जैसे ही उछाला जाएगा, वैसे ही इस स्टेडियम के साथ दून का नाम इतिहास के पन्नों पर दर्ज हो जाएगा। जैसे-जैसे मैच होते जाएंगे वैसे-वैसे 25 हजार दर्शक क्षमता वाले इस स्टेडियम के साथ ही देहरादून की कीर्ति देश से लेकर विदेशों तक निश्चित ही फैलेगी।

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वैसे तो देहरादून अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम को अफगानिस्तान के सैकेंड होम ग्राउंड बनाने और आईसीसी की हरी झंडी मिलने के बाद यह स्टेडियम अंतरराष्ट्रीय पटल पर छा चुका है।
लेकिन, टी-20 मैच के बाद क्रिकेट की रिकार्ड बुक में भी यह दर्ज हो जाएगा। साथ ही बीसीसीआई पर उत्तराखंड क्रिकेट को मान्यता देने का दबाव भी बढ़ेगा।

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) के संरक्षक पीसी वर्मा का कहना है कि तीन जून का दिन प्रदेश के लिए एतिहासिक दिन है, इस दिन देहरादून की धरती पर पहली बार इंटरनेशनल क्रिकेट मैच खेला जा रहा है। हर उत्तराखंड वासी के लिए यह सम्मान का विषय होने के साथ ही देहरादून इंटरनेशनल क्रिकेट मैप पर आ जाएगा। मैच के सफलतापूर्वक आयोजन के बाद बीसीसीआई पर भी निश्चित ही प्रदेश को मान्यता देने का दबाव बनेगा।

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अफगानिस्तान और बांग्लादेश के बीच उत्तराखंड में पहला इंटरनेशनल मैच

arvind pandey meet afghanistan team - फोटो : amar ujala
उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव चंद्रकांत आर्य ने कहा कि अफगानिस्तान और बांग्लादेश के बीच उत्तराखंड की धरती पर पहला इंटरनेशनल मैच खेला जा रहा है, निश्चित ही यह बड़ी खुशी की बात है। आईसीसी ने मैदान को हरीझंडी दे दी और अफगानिस्तान ने इसे अपना होमग्राउंड बना लिया अच्छी बात है, लेकिन प्रदेश के खिलाड़ियों का क्या? वे तो अब भी बीसीसीआई की मान्यता नहीं होने से दूसरे राज्यों की ओर मुंह देखने को मोहताज हैं। बीसीसीआई को जो भी फैसला लेना है जल्द ले ताकि प्रदेश के बच्चों का भला हो।

उत्तरखंड क्रिकेट एसोसिएशन के दिव्य नौटियाल ने कहा कि,  उत्तराखंड के लिए तीन जून का दिन एक नया सवेरा लेकर आएगा। देहरादून के रायपुर स्थिति स्टेडियम में अफगानिस्तान और बांग्लादेश के बीच इंटरनेशनल मैच होने से प्रदेश के खिलाड़ियों देखने और सीखने का मौका मिलेगा। साथ ही बीसीसीआई और क्रिकेट प्रशासक समिति से अनुरोध है कि अब प्रदेश और खिलाड़ियों के हित में जितनी जल्दी हो सके मान्यता का मामला हल कर। आयोजन के लिए सरकार को भी बधाई, लेकिन इतने बड़े आयोजन के लिए प्रदेश में कार्यरत अन्य एसोसिएशनों को भी बुलाना चाहिए।  
 
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स्टेडियम की खासियत

Rajiv gandhi international stadium
स्टेडियम की खासियत
देहरादून की खूबसूरत वादियों के बीच 23 एकड़ में फैला क्रिकेट स्टेडियम कई अंतरराष्ट्रीय खूबियों से भरपूर है। यही वजह है कि आईसीसी मैच रेफरी व पूर्व टेस्ट क्रिकेटर जवागल श्रीनाथ ने इसे देखते ही हरीझंडी दे दी थी। स्टेडियम के मुख्य संचालन अधिकारी नीरज गुप्ता से स्टेडियम के खूबियों के बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि बारिश होने की स्थिति में सब स्वैल ड्रेनेज सिस्टम होने से स्टेडियम को आधे घंटे के भीतर दोबारा मैच के लिए तैयार किया जा सकता है। कोलाज डिजाइन पर तैयार यह स्टेडियम भारत का पहला लीड (ऊर्जा और पर्यावरण डिजाइन) गोल्ड मानक स्टेडियम है। पांच इंटरेनशल पिच के साथ ही पांच प्रेक्टिस पिच भी हैं। 10/10 की दो वीडियो स्क्रीन के अलावा हाई डेफनीशन प्रसारण के अनुकूल चार हाई मास्ट लाइटें लगी हैं। बरमूडा घास की हरियाली मैदान को अलग की लुक देती है। इस स्टेडियम की सबसे खास बात ये है कि आपातकाल की स्थिति में स्टेडियम में मौजूद सभी दर्शकों को महज आठ मिनट के भीतर सुरक्षित रूप से बाहर निकाला जा सकता है।

पाल साहब होते तो काफी खुश होते...
युनाइटेड क्रिकेट एसोसिएशन के संरक्षक और पूर्व टेस्ट क्रिकेट राजेंद्र पाल आज अगर होते तो निश्चित ही खुशी के मारे फूले नहीं समाते। मालूम हो कि प्रदेश को बीसीसीआई की मान्यता दिलाने के लिए राजेंद्र पाल दिल्ली क्रिकेट एसोसिएशन छोड़कर देहरादून आ गए थे और मरते दम तक प्रदेश की मान्यता के लिए प्रयास करते रहे। इस बारे में जब उनके पास अंतिम समय मौजूद रहे सीएयू के मीडिया कॉर्डिनेटर रोहित चौहान से बात की गई तो उन्होंने बताया कि आज अगर वह होते तो बेहद खुश होते। उन्हें लगता कि उन्होंने प्रदेश के क्रिकेट की बेहतरी के लिए जो भी प्रयास किए वह रंग लाए भले ही आधे अधूरे लाए। क्योंकि पूरे प्रयास तभी रंग लाएंगे जब प्रदेश को बीसीसीआई की मान्यता मिल जाएगी।
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