परंतु उक्त खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। सुनवाई के दौरान परिवादी व प्रतिवादी की ओर से दलीलें पेश कर साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। दलीलों को सुनने व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम वर्ग अखिलेश कुमार पांडेय ने परिवादी के दावे को सही माना।
अदालत ने प्रतिवादी शब्बीर को एनआई एक्ट का दोषी मानते हुए उसे एक वर्ष के कारावास व 2.60 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने जुर्माने की राशि से 2.55 लाख रुपये परिवादी को प्रतिकर के रूप में अदा करने तथा शेष पांच हजार रुपये की राशि राजकोष में जमा कराने के आदेश दिए हैं।