देशभर में कोरोना संक्रमितों के आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं। कोरोना की तीसरी लहर के बीच 14 जनवरी को प्रयागराज में संगम तट पर प्रसिद्ध माघ मेला शुरू होने जा रहा है। हर साल धर्मनगरी हरिद्वार और तीर्थनगरी ऋषिकेश से बड़ी संख्या में संत पुण्य स्नान के प्रयागराज जाते हैं। संक्रमण के खतरे को देखते हुए ऋषिकेश के संतों ने उत्तरप्रदेश सरकार को माघ मेले को कोविड नियमों के पालन के साथ प्रतीकात्मक रूप से मनाने का सुझाव दिया है।
कोरोना संक्रमण को देखते यूपी सरकार को माघ मेले के बड़े आयोजन से बचना चाहिए। हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लाखों लोगों की भावना आहत न हो, इसके लिए इस पर्व को केवल प्रतीकात्मक रुप से मनाया जाना ही उचित है।
-स्वामी कृष्णाचार्य महाराज, जगतगुरु उत्तराखंड पीठाधीश्वर, कृष्णकुंज आश्रम मायाकुंड़
कोरोना संक्रमण में कुंभ मेले को भी सूक्ष्म रूप से मनाए जाने पर जोर दिया गया था, लेकिन उसमें भी भीड़ उमड़ी। इसमें हजारों लोग संक्रमित हुए थे। माघ मेले का आयोजन प्रतीकात्मक रूप में होना चाहिए।
महामंडलेश्वर ईश्वरदास महाराज, संस्थापक कृष्णायन देशी गोशाला, शीशमझाड़ी
कोरोना संक्रमण और नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के आने से हमने माघ मेले में जाने की योजना स्थगित कर दी है। सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले अन्य पर्वों पर स्नान करेंगे। कोरोना संक्रमण को देखते हुए इसे प्रतीकात्मक रुप से मनाना ही सही है।
-महामंडलेश्वर स्वामी दयारामदास, अध्यक्ष रामतपस्थली सनकादिकपीठ ब्रह्मपुरी
कोरोना के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए हरिद्वार प्रशासन ने मकर संक्रांति पर्व स्नान पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्रयागराज में भी आयोजित माघ मेले को अब प्रतीकात्मक रूप से मनाया जाना चाहिए।
-महामंडलेश्वर स्वामी विष्णुदास, अध्यक्ष धर्मराज मंदिर लक्ष्मणझूला