25 साल बाद भारत और नेपाल को एक खास सौगात मिली है। इससे दोनों देशों को व्यापार करने में आसानी हो सकेगी।
दरअसल, भारत-नेपाल को जोड़ने के लिए एक और झूलापुल बनकर तैयार हो गया है। धारचूला और तवाघाट के बीच रौंगती नाले के पास तिकड़म नामक स्थान पर महाकाली नदी पर बनाए गए इस पुल की लंबाई 195 मीटर है।
नेपाल सरकार ने इस पुल का निर्माण 60 दिन में कर दिया। 28 लाख रुपये की लागत के इस पुल के बनने से नेपाल के हूती, तिकड़म, बाटामूनी, फारा आदि गांव के लोगों को भारतीय क्षेत्र में आने में आसानी होगी। भारतीय क्षेत्र के खेला, ऐलागाड़, स्यांकुरी, सेरी, जुम्मा, लाली, रोड़ा, तवाघाट के लोग भी अब आसानी से नेपाल जा सकेंगे।
धारचूला से कालापानी तक भारत-नेपाल सीमा पर 80 किमी लंबी सीमा पर अब तक एक भी पुल नहीं था। इस कारण नदी के दोनों ओर बसे लोग जान जोखिम में डालकर तार के सहारे अवैध तरीके से आवाजाही करने को मजबूर थे। हर साल कई लोगों को महाकाली में गिर कर अपनी जान गंवानी पड़ती थी।
विगत 25 वर्षों से भारत एवं नेपाल के लोग लाली, तिकड़म और दुमंलिंग में पुल निर्माण की मांग करते आ रहे थे, ताकि लोग वैध रास्तों से आवाजाही करें और तस्करी पर भी अंकुश लगाया जा सके। पिछले दिनों भारत सरकार ने तिकड़म और लाली में झूलापुल के स्वीकृति दे दी थी। तिकड़म पुल बनकर तैयार हो गया है।
इस पुल का निर्माण नेपाल सरकार ने किया है। नेपाल के पत्रकार राजेंद्र कुंवर ने बताया कि 195 मीटर लंबे और तीन मीटर चौड़े इस पुल को बनने में 28 लाख रुपये (नेपाली) की लागत आई और यह 60 दिन में बनकर तैयार हो गया। शुक्रवार से इस पुल से आवाजाही होने लगी है। पुल के पास भारतीय क्षेत्र में एसएसबी और नेपाल की तरफ नेपाल प्रहरी के जवान तैनात कर दिए हैं।