राजधानी में स्वाइन फ्लू से हुई मौतों का अब डेथ ऑडिट होगा। पिछले एक पखवाडे़ के दौरान स्वाइन फ्लू से सात मरीजों की मौत हुई है, जिनमें से छह अकेले श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में हुई। स्वास्थ्य महानिदेशालय ने इस पर संदेह व्यक्त करते हुए ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल पिछले कुछ दिनों में पटेलनगर स्थित श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में स्वाइन फ्लू से छह मरीजों की मौत हो चुकी है। इस पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने सभी मरीजों की मौत के वास्तविक कारणों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है।
स्वास्थ्य महानिदेशालय ने सभी जिलों को संदिग्ध मरीजों की मौत के मामले में डेथ ऑडिट अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऑडिट के बाद ही मृत्यु के वास्तविक कारणों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
स्वास्थ्य महानिदेशक डा. तारा चंद पंत के अनुसार कोई भी मरीज कई बीमारियों से पीड़ित हो सकता है। लेकिन उसकी मौत उनमें से किसी एक बीमारी से होती है। ऐसे में उसकी मौत के वास्तविक कारणों को जानने के लिए डेथ ऑडिट किया जाता है। इसमें विशेषज्ञ उसकी रिपोर्ट का अध्ययन कर मृत्यु के वास्तविक कारणों की पड़ताल करते हैं। उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक पड़ा। उपचार के दौरान उसे स्वाइन फ्लू भी हो गया। व्यक्ति की मौत हार्ट अटैक से हुई। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि उसकी मौत स्वाइन फ्लू से हुई है। जबकि वह स्वाइन फ्लू से भी पीड़ित था।
स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों का हम सैंपल लेते हैं। एक सैंपल की हम खुद जांच करते हैं। दूसरा सैंपल सीएमओ कार्यालय को भेजा जाता है। हमने सभी भर्ती मरीजों और मृतकों की पूरी रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय को भेजी थी। गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के स्वाइन फ्लू पॉजिटिव मिलने पर उनकी जान पर खतरा बढ़ जाता है। ज्यादातर बुजुर्ग, गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को स्वाइन फ्लू से मृत्यु का खतरा भी बढ़ जाता है।
-भूपेंद्र रतूड़ी, वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी, श्री महंत इंदिरेश अस्पताल।
स्वाइन फ्लू के मामलों में हम केवल राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) की रिपोर्ट मानते हैं। अस्पताल ने अपनी लैब में जांच के बाद स्वाइन फ्लू की पुष्टि की है। हम डेथ ऑडिट कराने के बाद ही मृत्यु के वास्तविक कारणों को लेकर कुछ कहेंगे।
-डा. ताराचंद पंत, स्वास्थ्य महानिदेशक