स्वाइन फ्लू की दहशत में लोग हल्के सर्दी-जुकाम को भी खतरनाक मानने लगे हैं। खांसी हुई, नाक बही या गले में खराश हुई तो लोग तुरंत अस्पताल दौड़ रहे हैं। यहां तक तो फिर भी ठीक है, लेकिन डॉक्टर के दवा देने के बाद भी कई संतुष्ट नहीं हो रहे। उनका जोर इसी बात पर है कि डॉक्टर उनका ब्लड सैंपल जांच के लिए दिल्ली भिजवा दें।
वे दिल्ली से आने वाली रिपोर्ट पर ही भरोसा करना चाहते हैं। लोगों का यह रवैया इन दिनों दून अस्पताल के डॉक्टरों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। डॉक्टरों के समझाने पर भी लोग नहीं मान रहे। डॉक्टर स्वाइन फ्लू के प्राथमिक लक्षण दिखने पर ही खून के नमूने भेजने की बात कहते हैं तो कई लोग नेताओं से लेकर शासन स्तरीय अधिकारियों तक से सिफारिश लगवाने से नहीं चूक रहे।
सिर्फ स्वाइन फ्लू के नमूने भेजें
दिक्कत इसलिए भी बढ़ र्गई है कि दिल्ली स्थित प्रयोगशाला ने सिर्फ स्वाइन फ्लू के संदिग्ध रोगियों के ही नमूने जांच के लिए भेजने की सख्त हिदायत दे दी है। साफ कहा है कि सर्दी-जुकाम के पीड़ितों के नमूने किसी हाल में न भेजे जाएं।
आठ मरीजों के नमूने भेजे
शुक्रवार को जिला स्वास्थ्य विभाग ने स्वाइन फ्लू से मिलते जुलते लक्षणों वाले आठ मरीजों के रक्त नमूने जांच के लिए दिल्ली भेजे। इसमें वैश्य नर्सिंग होम और हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट में भर्ती तीन-तीन और सीएमआई में भर्ती दो मरीज शामिल हैं।
स्वाइन फ्लू घातक रोग है, लेकिन इसका इलाज संभव है। दूसरी ओर, हर सर्दी-जुकाम स्वाइन फ्लू नहीं होता। डॉक्टरों की सलाह और उचित इलाज से वायरल ठीक हो जाता है। लेकिन कई लोग मानते ही नहीं। बिना वजह दबाव बनाकर ब्लड सैंपल भेजने की बात कहते हैं। इससे प्रयोगशाला पर भी दबाव बढ़ जाता है और असल रोगियों के नमूनों की जांच में भी देरी हो सकती है। ऐसे लोगों को समझाने की कोशिश की जा रही है।
-डा. एसपी अग्रवाल, मुख्य चिकित्साधिकारी