स्वाइन फ्लू के मामले में छोटी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। वायरल होने के कारण इसके प्रारंभिक लक्षण अन्य सामान्य मौसमी बीमारियों की तरह ही होते हैं।
इसलिए इसकी पहचान आसानी से नहीं हो पाती है। मौसमी बीमारियां यानी खासी-जुकाम और बुखार को हल्के में ना लें। ऐसे मामलों में चिकित्सक तुरंत उपचार शुरू करने का परामर्श देते हैं।
हाल ही में स्वाइन फ्लू से हुई दोनों मरीजों की मौत का कारण अंतिम स्टेज में उपचार शुरू करना बताया जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार अगर उन्होंने समय से उपचार शुरू कराया होता तो मौत को रोका जा सकता था। डाक्टरों के अनुसार कुछ सावधानियां बरत कर स्वाइन फ्लू से बचा जा सकता है।
शुरूआती चरण में मरीज को दवा की जरूरत नहीं होती। शरीर खुद ही अपने अंदर जमा प्रतिरोधक क्षमता का इस्तेमाल बीमारी से निपटने के लिए करता है। लेकिन इसके बाद अगर बीमारी पर नियंत्रण नहीं हुआ तो रोग जानलेवा साबित हो सकता है।
मरीजों में कैसे हुआ संक्रमण
स्वास्थ्य विभाग दोनों मृतकों के संक्रमित होने के कारणों की तलाश कर रहा है। एक मरीज पौड़ी और दूसरा डोईवाला में रहकर स्वाइन फ्लू से संक्रमित हुए। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग उनके परिवार के साथ आसपास के लोगों की भी जांच कर रहा है। दोनों भर्ती मरीजों के रैपिड टेस्ट में डेंगू की पुष्टि हुई है। हालांकि उनकी एलाइजा रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य वायरल की तरह ही होते हैं। तेज बुखार, ठंड लगाना, गले में खराश, खांसी, मांस-पेशियों और सिर दर्द होना और कमजोरी महसूस होना। डॉक्टरों के मुताबिक स्वाइन फ्लू के मरीज में तीन अलग-अलग लक्षण देखने को मिलते हैं। इसलिए वायरल लंबा खिंचने पर भी स्वाइन फ्लू (एन्फ्लूएंजा एच1एन1) की जांच करा लेनी चाहिए।
यह सावधानी बरतें
- स्वाइन फ्लू से बचने के लिए साफ-सफाई का खास ख्याल रखें।
- स्वाइन फ्लू के लक्षण भी दिखें तो मास्क पहनना शुरू कर दें।
- खांसते समय छींकते समय नाक-मुंह को रुमाल या टीशू पेपर से कवर करें।
- अल्कोहल बेस्ड सैनटाइजर का इस्तेमाल करें।
- हाथ मिलाने से बचें और नियमित अंतराल पर हाथ धोते रहें।
- सांस लेने में परेशानी, तीन-चार दिन से बुखार हो तो डॉक्टर को दिखाएं।
- स्वाइन फ्लू के टेस्ट में गले और नाक के द्रव्यों की जांच की जाती है, जिससे एच1 एन1 वायरस की पुष्टि होती है।
- ऐसा कोई भी टेस्ट डॉक्टर की सलाह के बाद ही कराएं।
- बिना मास्क पहने भीड़भाड़ में ना जाएं, अस्पताल जाते समय सावधानी बरतें।
बच्चों का रखें खास ख्याल
बच्चों को अक्सर ठंड में सांस लेने में दिक्कत होती है। जकड़न के साथ निमोनिया की भी शिकायत रहती है। इन हालात में बच्चों का खास ख्याल रखें। लंबे समय तक दिक्कत हो तो जांच कराएं।
इन्हें हाई रिस्क
85 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग
दो साल से कम उम्र के बच्चे
एचआईवी से संक्रमित मरीज
गर्भवती महिलाएं और प्रसूताएं
सांस, लीवर और किडनी के मरीज 19 वर्ष और इस बीच के युवक
स्वाइन फ्लू और सामान्य सर्दी-जुकाम के बीच शुरूआत में अंतर नहीं किया जाता है, लेकिन स्वाइन फ्लू बढ़ने पर जानलेवा साबित हो सकता है। सबसे ज्यादा जरूरी है कि मरीज को सही समय पर अस्पताल पहुंचाया जाए। समय पर उपचार देने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
- डॉ. एसपी अग्रवाल, सीएमओ