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उत्तराखंडः स्वाइन फ्लू से हालात खराब, डरे नहीं लड़ें

Thu, 19 Feb 2015 12:22 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू के अब तक 12 मामले पॉजिटिव मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कुल 80 सैंपल जांच के लिए भेजे थे, जिनमें से 47 की रिपोर्ट विभाग को मिली है।
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स्वाइन फ्लू के दो मामलों में संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु भी हो चुकी है। बुधवार को विधानसभा में हुई समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने इस जानलेवा बीमारी की पर्याप्त दवा होने का भी दावा किया। स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को लोगों को स्वाइन फ्लू के प्रति जागरूक करने का भी निर्देश दिया।

प्रमुख सचिव ओमप्रकाश ने बताया कि इस बारे में जानकारी देने के लिए कुछ अधिकारियों को नामित किया गया है। स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक डीजी हेल्थ को भी निर्देश दिए गए हैं कि स्वाइन फ्लू के मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ने पर निजी अस्पताल में रेफर करने के निर्देश डॉक्टरों को दिए जाएं।
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इसका खर्च स्वास्थ्य विभाग उठाएगा। स्वास्थ्य विभाग को और दवा मंगाने का भी निर्देश दिया गया है। सभी चिकित्सालयों में आइसोलेशन की व्यवस्था कराने, स्वाइन फ्लू के मरीजों को तत्काल सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी डीजी हेल्थ को दिए गए।

स्वाइन फ्लू की जानकारी, देंगे ये अधिकारी
- स्वास्थ्य महानिदेशक - 9412050593
- अपर सचिव डा. नीरज खैरवाल - 8979002222
- डॉ. अखिलेश त्रिपाठी - 9758872332
- डॉ. किरण बिष्ट - 9411753324

चहेतों की चिंता, मरीजों से खेल

मनीष चंद्र भट्ट, देहरादून

जानलेवा स्वाइन फ्लू को लेकर सेहत विभाग का भेदभाव लोगों को अखरने लगा है। विभाग ने चहेते डॉक्टरों को फ्लू से बचाने के लिए जहां उच्च गुणवत्ता वाले मास्क दिए हैं, वहीं दून अस्पताल में सामान्य वार्ड के सामने ही स्वाइन फ्लू वार्ड बनाकर सामान्य मरीजों को खतरे में डाल दिया है। इस पर मरीजों के परिजनों ने प्रबंधन और विधायक राजकुमार से एतराज जताया है।

स्वाइन फ्लू और प्राथमिक लक्षणों के मामले बढ़ने पर दून अस्पताल प्रबंधन ने करीब दो हफ्ते पहले जनरल वार्ड के सामने आइसोलेशन वार्ड बनाया। मरीज बढ़े तो दस बेड आरक्षित कर दिए, मगर सामान्य वार्ड और स्वाइन फ्लू वार्ड के बीच कोई अवरोधक नहीं रखा।

सामान्य वार्ड में रोजाना करीब 25 मरीज भर्ती होते हैं। यहां जिस दरवाजे से मरीज-तीमारदार आते-जाते हैं वह स्वाइन फ्लू वार्ड की तरफ ही खुलता है।

चहेतों को मास्क बांटने पर डॉक्टरों का विरोध
आरोप है कि दून अस्पताल ने कुछ चहेते डॉक्टरों को उच्च गुणवत्ता वाले मास्क बांटे हैं। उन्हें अस्पताल स्टोर से मास्क दिया गया है। मगर इमरजेंसी वार्ड समेत कुछ अन्य डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ को मास्क नहीं मिले हैं।

इन डॉक्टरों ने प्रबंधन से विरोध जताया है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. केसी पंत के मुताबिक, स्वाइन फ्लू का वायरस तेजी से फैलता है। इसलिए उच्च गुणवत्ता मास्क जरूरी है। इससे बचाव के लिए विशेष मास्क जरूरी है।

आइसोलेशन वार्ड के कमरे हर वक्त बंद रखे जाते हैं। फ्लू फैलने का खतरा नहीं है। मास्क कुछ डॉक्टरों ने खुद खरीदे होंगे। मैंने किसी को नहीं बंटवाए।
- डॉ. आरएस असवाल, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक
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तीन संदिग्ध मरीज दून रेफर, दो बच्चे भी भर्ती

स्वाइन फ्लू के लक्षणों के आधार पर बुधवार को दून अस्पताल में दो बच्चों और एक महिला को भर्ती कराया गया है। बच्चों में एक लड़का (12) और लड़की (8) है। डॉक्टरों ने दोनों की हालत सामान्य बताई है। वहीं, विकासनगर क्षेत्र से आई सहारनपुर निवासी महिला की भी हालत सामान्य है।

बुधवार को सहारनपुर निवासी महिला को परिजन जीवनगढ़ स्थित कालिंदी अस्पताल लेकर पहुंचे। वह ढकरानी गांव में रिश्तेदारी में आई थी। डाक्टरों ने स्वाइन फ्लू के लक्षण के आधार पर गर्भवती महिला को दून रेफर कर दिया। महिला का इलाज करने वाले डॉ. विकास अवस्थी ने कहा कि मरीज को सांस लेने में परेशानी थी।

फ्लू के डर से खूब बिक रहे मास्क
स्वाइन फ्लू के बढ़ते प्रकोप के चलते आम मरीज भी अस्पतालों में मास्क पहनकर आ रहे हैं। दवा की दुकानों पर भी दुकानदार मास्क इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि इनकी गुणवत्ता सवालों के घेरे में है।

डॉक्टरों का कहना है कि स्वाइन फ्लू वायरस का संक्रमण रोकने में थ्री लेयर (तीन परत वाला) मास्क ही कारगर होता है। बाजार में यह 300 रुपडॉ तक में उपलब्ध है। मगर अस्पतालों में ज्यादातर सामान्य मास्क बांटे गए हैं।

भीड़ वाली जगहों पर नहीं भेजें बच्चे
बढ़ते स्वाइन फ्लू के मामलों को देखते हुए शिक्षा विभाग ने स्कूलों को अलर्ट जारी किया है। शिक्षा महानिदेशक डी. सेंथिल पांडियन ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए बच्चों और अभिभावकों को जागरूक किया जाए। छात्र-छात्राओं को भीड़ वाले स्थानों में न जाने दिया जाए।

शिक्षा महानिदेशक ने कहा कि स्वाइन फ्लू एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है। मरीज के छींकने, खांसने से, हाथ न धोने से फैल सकता है। छात्र-छात्राओं को बार-बार हाथ धोने के लिए प्रेरित किया जाए।

विद्यालय परिसर, कक्ष और शौचालयों को साफ रखा जाए। जिला और ब्लॉक स्तरीय अधिकारी क्षेत्रों का भ्रमण कर स्वाइन फ्लू के संदिग्ध छात्रों को अस्पतालों में भेजने की व्यवस्था करें। बच्चों के हाथ धोने के लिए साबुन, डिटरजेंट और फिनायल आदि खरीदने के लिए स्कूलों को धनराशि भेज दी गई है।

स्वाइन फ्लू से चिंतित होने की जरूरत नहीं है। दून अस्पताल में 62 सैंपल लिए गए हैं। इनमें 10 में पुष्टि हुई है। दून अस्पताल में इसकी पर्याप्त दवा है।
- डॉ. एसपी अग्रवाल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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