अखाड़ा सचिव बताया कि अखाड़े ने बाबा की गतिविधियों पर आपत्ति जताते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है। श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने बताया कि वैराग्यनंद गिरी के बयान की जानकारी मिलने पर अखाड़ा पंच के सामने यह प्रकरण रखा गया था।
इसमें यह निर्णय लिया गया कि वैराग्यानंद गिरी को अखाड़े से निष्कासित किया जाए। अखाडे़ के श्रीमहंत और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज ने कहा कि हम संत हैं हमें सभी का हित करना है।
देश और समाज के हित में काम करना हमारा ध्येय है लेकिन हम किसी को जिताने के लिए किसी का अहित करने की बात करें यह उचित नहीं है। संतों को ऐसे पाखंड से दूर रहना चाहिए। उन्होंने अन्य संतों से भी ऐसे कृत्यों से दूर रहने की सलाह दी।