उन्होंने कहा संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण विभाग ने अपने ब्लॉग के माध्यम से गंगा के मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया और गंगा पर बांध न बनाने और खनन न करने की हिदायत दी।
स्वामी शिवानंद ने कहा कि ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने अनशन शुरू करने से पूर्व 21 अक्तूबर को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। 30 अक्तूबर को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मंत्रालय को पत्र ट्रांसफर कर दिया गया।
नितिन गडकरी द्वारा 26 नवंबर को पत्र का जवाब दिया गया जिसमें गंगा एक्ट के लिए स्वामी सानंद की मांगों को मान लिए जाने की बात कही गई है।
स्वामी शिवानंद ने कहा कि वास्तव में स्वामी सानंद की मांगों को नहीं माना गया है। देर से पत्र का जवाब देने से ही स्पष्ट होता है कि गंगा के प्रति सरकार गंभीर नहीं है और मातृसदन भी सरकार के एक्ट को रिजेक्ट करता है।