बता दें कि देश के प्रख्यात संतों में शुमार भारत माता मंदिर के संस्थापक एवं निवर्तमान शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने राम मंदिर का निर्माण जल्द शुरू नहीं होने पर छह दिसंबर से हरकी पैड़ी पर अनशन करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अब मंदिर के लिए निर्णायक आंदोलन किया जाएगा।
ऐसे में अगर स्वामी सानंद की तरह उनके प्राण भी चले जाएं तो कोई बात नहीं। उन्होंने सरकार और सुप्रीम कोर्ट से देश के बहुसंख्यक समाज की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राम मंदिर का निर्माण शुरू कराने की मांग की है। सोमवार को हरिपुर कलां स्थित अपने आश्रम में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने कहा कि शायद राम मंदिर बलिदान चाहता है।
जिस तरह से स्वतंत्रता आंदोलन महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के बनाए गए सभी कानून तोड़कर चलाया था, अब इसी तरह राम मंदिर के लिए आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आजादी तब मिली थी, जब सरदार भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां को फांसी दी गई, लेकिन वह हिंसा में विश्वास नहीं रखते हैं। उन्होंने कहा कि बहुसंख्यक समाज की भावना है कि अयोध्या में राम मंदिर बने और इसके लिए वे हरिद्वार में हरकी पैड़ी पर अनशन शुरू करेंगे।
स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने कहा कि बहुसंख्यक समाज की भावनाओं का सम्मान नहीं किया गया तो इस बार वृहद आंदोलन छेड़ा जाएगा और 50 लाख से भी ज्यादा लोग जेल जाएंगे। उन्होंने कहा कि वे देशभर के संतों के साथ ही पत्रकार, चित्रकार, कवि, साहित्यकार और समाज को जाग्रत करने वाले सभी लोगों से इस बारे में पहल की अपील करते हैं।
स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने सुप्रीम कोर्ट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी राम मंदिर पर बड़ा दिल दिखाने की बात कही। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी यह चिंता छोड़ दें कि वे फिर से प्रधानमंत्री बनेंगे या नहीं। अगर राष्ट्र रहेगा और भगवान राम रहेंगे तो नरेंद्र मोदी भी आदर्श पुरुष बन जाएंगे।
वयोवृद्ध स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि देश के संतों में बहुत ऊंचा स्थान रखते हैं। वे भानुपुरा पीठ के शंकराचार्य पर आसीन रह चुके हैं। दशनाम संन्यासियों में प्रमुख निरंजनी अखाड़े में उन्हें महामंडलेश्वर पद का आसन प्राप्त है। भारत माता मंदिर के संस्थापक स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि विश्व हिंदू परिषद के संस्थापक न्यासी भी हैं।
संतों की कोटि में स्वामी सत्यमित्रानंद श्रेष्ठ वक्ता का स्थान भी रखते हैं। युवावस्था में स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने गिरिजनों, वनाचंलों आदि में जाकर धर्म प्रचार किया। उन्होंने हरिद्वार में भारत माता मंदिर की स्थापना की। भारत में यह अकेला ऐसा मंदिर है, जहां देवी-देवताओं के साथ-साथ शहीदों, महात्मा गांधी जैसे नेताओं, भगवान वाल्मीकि और संत रविदास जैसे धर्म प्रवर्तकों की प्रतिमाएं भी विद्यमान हैं।
इस मंदिर में देश की बड़ी-बड़ी हस्तियों का आगमन होता रहा है। स्वामी सत्यमित्रानंद ने अनेक धर्म संसदों, मार्ग दर्शक मंडल बैठकों और संत सम्मेलनों की अध्यक्षता की है। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद से लंबे समय से जुड़े हुए हैं। जूनापीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि और विख्यात हस्ती स्वामी गोविंद गिरि उनके शिष्य रहे हैं।