एम्स प्रशासन इस पर राजी नहीं हुआ तो एडवोकेट विजय वर्मा ने कोर्ट में याचिका दाखिल की दी। कोर्ट ने पार्थिव शरीर के दर्शन के लिए रविवार तक का समय दिया है। इसी क्रम में पिछले 4 नवंबर को करीब दो दर्जन अनुयायी एम्स पहुंचे थे।
तैयारियां न होने के कारण उन्हें निराश लौटना पड़ा। क्षुब्ध याचिकाकर्ता एम्स प्रशासन के खिलाफ कोर्ट में अवमानना दावा दाखिल करने के प्रयास में थे। इसी बीच एम्स प्रशासन ने प्रेसवार्ता कर दर्शन की व्यवस्था का खुलासा कर दिया। रविवार को स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर का दर्शन करवाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली थी।
एनाटमी विभाग के सामने ही पंजीकरण की व्यवस्था बनाई गई है। यहां कुर्सियां भी लगवा दी गई थी, जिससे दर्शनार्थी 10 की संख्या में जा सकें और बचे हुए लोगों को इंतजार में कोई असुविधा न हो।
फिलहाल 1:45 से अनुयायियों का आवागमन शुरू हुआ। पहले दिन दर्शन पाने वालों में श्यामपुर, गुमानीवाला, जौलीग्रांट, शिवाजीनगर, रानीपोखरी क्षेत्र से कुल छह लोग दर्शनार्थ पहुंचे। इनमें सुमित धीमान, अमित धीमान, संदीप जायसवाल, ओमप्रकाश, सोमपाल, सतेन्द्र शामिल रहे।
एम्स में दर्शन की सुविधा शुरू होने के बाद मातृ सदन से कोई आगंतुक दिखाई नहीं पड़ा। गौरतलब है कि मातृ सदन की ओर से स्वामी दयानंद ने स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर को सार्वजनिक दर्शन के लिए रखने का प्रस्ताव सबसे जोरशोर से उठाया था।
रविवार को जब उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो फोन नहीं उठा। उधर, याचिकाकर्ता विजय वर्मा अब भी असंतुष्ट हैं। उनका तर्क है कि दस की संख्या में अधिकतम 50 लोगों को दर्शन करवाना कहीं से भी जायज नहीं है। हम दोबारा कोर्ट में मसले को उठाएंगे।