मातृ सदन में आमरण अनशन पर बैठे स्वामी को 10 अक्टूबर को प्रशासन ने जबरन अनशन से उठवाकर ऋषिकेश के एम्स में भर्ती करा दिया था। स्वामी ने मंगलवार को जल भी त्याग दिया था। वह गंगा अधिनियम को लागू कराने की मांग को लेकर 111 दिन से अनशन पर बैठे थे।
इसके बाबत कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट किया था। केन्द्रीय जल संसाधन, भूतल परिवहन और मंत्री नितिन गडकरी ने भी प्रो. अग्रवाल से अपना अनशन समाप्त करने की अपील की थी, प्रतिनिधि भेजकर भी आग्रह किया था, लेकिन अग्रवाल ने अनसुना कर दिया था।
प्रो. केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पहले सचिव और राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय के सलाहकार भी रहे थे। पर्यावरण के क्षेत्र में प्रो. अग्रवाल को अग्रणी स्तर का ज्ञान था।
प्रो. अग्रवाल का जन्म 1932 में मुजफ्फरनगर के गांव कांधला में हुआ था। उन्होंने आईआईटी रुडक़ी, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले से सिविल इंजीनियरिंग और पर्यावरण के क्षेत्र में शिक्षा ग्रहण किया था और 17 साल तक आईआईटी कानपुर को अपनी सेवाएं दी थी।
- उत्तर प्रदेश राज्य सिंचाई विभाग में डिजाइन इंजीनियर के रूप में काम की शुरुआत
- बर्कले में कैलिफोर्निया विवि से पर्यावरण इंजीनियरिंग में पीएचडी की उपाधि
- मध्य प्रदेश के चित्रकूट में महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विवि में पर्यावरण विज्ञान के मानद प्रोफेसर
- आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग और पर्यावरण विभाग में हेड
- 1979-80 में प्रथम सचिव और राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय के सलाहकार
- रुड़की विवि में पर्यावरण इंजीनियरिंग के लिए अतिथि प्रोफेसर
- फिलहाल महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान के मानद प्राध्यापक (ऑनरेरी प्रोफेसर) थे।
- पर्यावरणीय गुणवत्ता में सुधार के लिए नीति बनाने और प्रशासनिक तंत्र को आकार देने वाली विभिन्न सरकारी समितियों के सदस्य रहे
- सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट नई दिल्ली के अग्रणी संस्थापक
- 2002 में आईआईटी कानपुर में उनके पूर्व छात्रों ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया।
- अपने प्रयास से उत्तराखंड में गंगा नदी पर बन रही कई परियोजनाओं के निर्माण को रुकवाया।
- 2011 में एक हिंदू संन्यासी बन गए और उन्हें स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद सरस्वती के नाम से जाना गया।