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111 दिन से अनशन पर बैठे स्वामी सानंद का एम्स ऋषिकेश में निधन, कहीं शोक तो कहीं आक्रोश

Fri, 12 Oct 2018 08:34 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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बुधवार को स्वामी सानंद को पुलिस ने जबरन उठाया था - फोटो : फाइल फोटो
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111 दिन से गंगा की अविरलता और निर्मलता को बनाए रखने के लिए आमरण अनशन कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद का गुरुवार दोपहर बाद एम्स में निधन हो गया। एम्स प्रशासन के मुताबिक उनकी मौत कार्डियक अरेस्ट के चलते दोपहर करीब दो बजे के आस-पास हुई। उनकी निधन की खबर आम होते ही उनके अनुयायियों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। सानंद के निधन से उपजे आक्रोश से उपजी किसी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए एहतियातन हरिद्वार और देहरादून की पुलिस एम्स में तैनात कर दी गई है। सरकार और कई आला अधिकारी हर घटनाक्रम पर नजर गड़ाए हुए हैं।

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एम्स प्रशासन के मुताबिक स्वामी सानंद पहले ही अपना शरीर एम्स, ऋषिकेश को दान किए जाने का संकल्प पत्र भर चुके थे, लिहाजा उनका शव एम्स में ही रखा गया है। किसी विवाद से बचने के लिए स्थानीय प्रशासन ने तय किया कि एम्स के पांच फोरेंसिंक एक्सपर्ट की टीम उनके पार्थिव शरीर का पोस्टमार्टम करेगी। गौरतलब है कि इससे पूर्व गंगा की अविरलता की मांग को लेकर अनशन करते हुए वर्ष 2011 में मातृसदन से जुड़े स्वामी निगमानंद का भी  निधन हो चुका है।

एम्स के जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल ने इस बात की पुष्टि की है। डाॅक्टरों के मुताबिक कमजोरी और हार्ट अटैक से स्वामी सानंद का निधन हुआ है। बुधवार को स्वामी सांनद को एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया था। लगातार कई महीनो से अनशन पर बैठे स्वामी सांनद ने मंगलवार को जल भी त्याग दिया था। स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद 22 जून से गंगा के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर अनशनरत थे।
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स्वामी सानंद के निधन के आहत और गुस्साए मातृ सदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद ने आरोप लगाया है कि सांनद की हत्या हुई है। उन्होंने कहा कि बुधवार को सानंद को एम्स ले जाते वक्त मैंने कहा था कि वहां उनको मार दिया जाएगा और वैसा ही हुआ। वहीं ब्रहृचारिणी विभा दीदी ने कहा है कि स्वामी सानंद ने गंगा के लिए जान दी है।

जबरन स्वामी सानंद को उठाकर एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया था

बता दें कि सांसद रमेश पोखरियाल निशंक से वार्ता विफल होने के बाद मंगलवार को उन्होंने जल भी त्याग दिया था। बुधवार को पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार दोपहर 12:30 बजे पुलिस बल मातृसदन पहुंचा था।

इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट और कनखल सीओ मातृसदन पहुंचे और आश्रम में धारा 144 लगाए जाने की बात कही। इस पर स्वामी शिवानंद भड़क गए और आश्रम में धारा 144 लगाना नियमों के विरुद्ध बताया। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने स्वामी शिवानंद से सानंद को ले जाने की अनुमति मांगी। सिटी

मजिस्ट्रेट के आग्रह को स्वामी शिवानंद मान गए। मगर स्वामी सानंद ने जाने से इनकार कर दिया था। इसपर सिटी मजिस्ट्रेट सहित पुलिस बल ने जबरन स्वामी सानंद को उठाकर एंबुलेंस में बैठाकर एम्स ऋषिकेश में भर्ती करा दिया था।

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कई बार एम्स में भर्ती कराया गया, लेकिन स्वामी ने अनशन नहीं तोड़ा

स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल ने गंगा रक्षा के लिए अपनी तरफ से तैयार ड्राफ्ट के आधार पर एक्ट बनाने के लिए केंद्र सरकार को नौ अक्तूबर तक का समय दिया था। मांग पूरी न होने पर वह दस अक्तूबर से जल त्यागकर अनशन पर बैठ गए थे।

स्वामी सानंद ने 13 जून को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था, लेकिन पत्र का कोई जवाब न आने पर वह 22 जून को अनशन पर बैठ गए थे। कुछ दिनों बाद प्रशासन ने उन्हें जबरन उठाकर एम्स में भर्ती कराया था।

कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उन्हें वापस मातृसदन छोड़ा गया था। केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने मातृसदन में स्वामी सानंद ने मिलकर अनशन समाप्त करने की अपील की थी। इस बीच उन्हें कई बार एम्स में भर्ती कराया गया, लेकिन स्वामी ने अनशन नहीं तोड़ा।
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