प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुरु और दयानंद आश्रम के प्रमुख स्वामी दयानंद सरस्वती बुधवार रात करीब 10.20 बजे ऋषिकेश के शीशमझाड़ी स्थित आश्रम में ब्रह्मलीन हो गए। वह काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके पार्थिव शरीर को बृहस्पतिवार को भक्तों और अनुयायियों के अंतिम दर्शन के लिए आश्रम में रखा जाएगा।
शुक्रवार को आश्रम में ही उन्हें भूसमाधि दी जाएगी। 11 सितंबर को स्वामी की कुशलक्षेम जानने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आश्रम आए थे। इसके दो दिन बाद ही स्वामी का स्वास्थ्य बिगड़ने पर हिमालयन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार को 11वें दिन उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। इस दौरान दिनभर उनके दर्शन के लिए शिष्यों, भक्तों और अनुयायियों का तांता लगा रहा।
दयानंद आश्रम के प्रतिनिधि गुणानंद रयाल ने बताया कि काफी समय से अस्वस्थ चल रहे स्वामी दयानंद ने आश्रम में भक्तों, अनुयायियों और साधकों के बीच बुधवार रात करीब 10.20 बजे अंतिम सांस ली।
स्वामी ने जताई थी इच्छा, गंगा किनारे निकलें प्राण
स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण 13 सितंबर को उन्हें हिमालयन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उन्हें आईसीयू में चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया। बुधवार पूर्वाह्न 11 बजे अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद स्वामी दयानंद सरस्वती को अस्पताल से आश्रम लाया गया। आश्रम में उन्हें ऑक्सीजन पर रखा गया था।
आश्रम सूत्रों ने उनकी हालत नाजुक बताई थी। स्वामी के आश्रम पहुंचते ही परिसर में उनके शुभचिंतकों, भक्तों, शिष्यों और अनुयायियों का तांता लग गया था, जो देररात तक चलता रहा। शुरुआती डेढ़ घंटे तक न तो आश्रम के किसी प्रतिनिधि ने उनके स्वास्थ्य के बारे में कुछ बताया और न ही उनके दर्शन की ही किसी को अनुमति दी गई।
दोपहर करीब साढ़े 12 बजे स्वामी दयानंद की शिष्या साध्वी ब्रह्म प्रकाशानंदा ने बताया कि चिकित्सकों ने उनके स्वास्थ्य पर चिंता जताई है। बताया कि लगातार बिगड़ते स्वास्थ्य के चलते चिकित्सकों ने स्वामी का उपचार करने से मना कर दिया है। बकौल साध्वी ब्रह्म प्रकाशानंदा स्वामी दयानंद सरस्वती की अंतिम इच्छा थी कि उनकी अंतिम सांसें गंगा किनारे अपने आश्रम में ही निकलें। इसी वजह से उन्हें आश्रम में लाया गया।
हाल जानने प्रधानमंत्री आए थे ऋषिकेश
काफी समय से अस्वस्थ चल रहे स्वामी दयानंद सरस्वती की कुशलक्षेम जानने के लिए उनके आध्यात्मिक शिष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते 11 सितंबर को आश्रम आए थे। उन्होंने गुरु स्वामी दयानंद का हालचाल जाना और उनका आशीर्वाद लिया था।
भक्त और शिष्य करते रहे दुआ
बुधवार को पूर्वाह्न जब बीमार स्वामी दयानंद सरस्वती को आश्रम लाया गया था, उसके बाद उनके दर्शन के लिए अनुयायियों, भक्तों की आश्रम में कतारें लग गई थीं। हर कोई स्वामी के स्वास्थ्य के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते रहे। इस दौरान कोई गीता का पाठ कर रहा था तो, कोई भागवत पुराण पढ़कर अपने गुरु के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता देखा गया।
शिष्यों की आंखों से छलके आंसू
स्वामी दयानंद सरस्वती की गंभीर हालत देखकर आश्रम में मौजूद उनके कई शिष्यों की आंखों से आंसू छलक रहे थे। वह चाहकर भी अश्रुधारा रोक नहीं पा रहे थे। इस दौरान आश्रम परिसर में पहुंचे स्वामी के शिष्य गुरु के दर्शन करके रोने लगे।