कथित रूप से हिंदू धर्म के खिलाफ बोलने से चर्चाओं में रहे और देशभर में आर्य समाज के सिद्धांतों को स्थापित करने वाले स्वामी अग्निवेश ने कहा कि देश में हिंदू आएं तो उन्हें शरणार्थी कहा जाता है, मुस्लिम आएं तो उन्हें आतंकवादी। जबकि हर मुसलमान आतंकवादी नहीं हो सकता।
देश में आए रोहिंग्या शरणार्थियों के बाबत उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान होने तक उन्हें देश में जगह दी जानी चाहिए। साथ ही उन्हें वापस भेजने के लिए म्यांमार देश पर केंद्र सरकार को दबाव बनाना चाहिए।
वैदिक मोहन आश्रम हरिद्वार से 21 सितंबर को पाखंड खंडिनी पताका अभियान की शुरुआत करते हुए स्वामी अग्निवेश शुक्रवार को रुड़की पहुंचे। यहां एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि भारत की नैतिक और प्राचीन परंपरा रही है कि हमने हमेशा बाहरी लोगों को गले लगाया है।
इसी तर्ज पर वर्तमान सरकार को भी रोहिंग्या शरणार्थियों को जगह देनी चाहिए। हालांकि उन्हाेंने स्थायी रूप से इन्हें देश में बसाने की हिमायत नहीं की। पाखंड खंडिनी पताका अभियान के संबंध में उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य धर्म के नाम पर पाखंड को समाप्त करना है।
फर्जी संतों की सूची जारी करने का स्वागत
महर्षि दयानंद ने 150 साल पहले हरिद्वार के वैदिक मोहन आश्रम में पाखंड खंड खंडिनी पताका गाड़ी थी। उसी संदेश को लेकर वह देशभर में घूमेंगे। इसके तहत वह शनिवार को देवबंद स्थित महमूद हॉल में एक सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री से संविधान की धारा 51 (1) को ईमानदारी से लागू करने की मांग की। इस दौरान वाईपी सिंह, समाजसेवी मुजीब मलिक, सीए हेमंत अरोड़ा, बंधुआ मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव श्योताज सिंह, मनोहर मानव, प्रवेश आर्य, कल्याण सिंह, मोलाना एआर शाहीन आदि मौजूद रहे।
स्वामी अग्निवेश ने कहा कि राम रहीम और आशाराम समेत सभी पाखंडियों को जेल भेजना होगा। इस दौरान उन्होंने अखाड़ा परिषद की ओर से फर्जी संतों की सूची जारी करने के कदम का स्वागत किया। स्वामी अग्निवेश ने आईआईटी रुड़की पहुंचकर निदेशक प्रो. एके चतुर्वेदी से मुलाकात की और उनसे छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने पर जोर दिया।