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स्वच्छ सर्वेक्षण 2019: इंदौर के मॉडल और लोगों की सोच बदलने से ही बनेगी बात

Thu, 07 Mar 2019 01:28 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal सुनीत द्विवेदी, अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून - फोटो : AmarUjala
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मध्य प्रदेश के इंदौर शहर का स्वच्छता मॉडल और लोगों की सोच बदलने से ही देहरादून स्वच्छता की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। आम जनता की भागीदारी के बिना न तो शहर की सूरत बदलेगी और न ही व्यवस्थाओं में कोई परिवर्तन आएगा। नगर निगम के साथ-साथ हमें भी स्वच्छता के लिए अपनी भूमिका तय करनी होगी। कम से कम इंदौर का साफ-सफाई का माहौल तो यही संदेश दे रहा है। 

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सफाई को लेकर लोगों की सोच में बदलाव की जिस थ्योरी पर इंदौर ने काम किया, उसी तरह देहरादून नगर निगम को भी रणनीति बनानी होगी। वहां की जनता की तरह हमें भी स्वच्छता को लेकर जागरूक होना पड़ेगा। सफाई की जिम्मेदारी केवल नगर निगम की नहीं, बल्कि हमारी भी है। हम शहर में फैली गंदगी के लिए हमेशा नगर निगम प्रशासन को कठघरे में खड़ा करते हैं।

इंदौर के लगातार तीसरी बार पहले स्थान पर रहने की मुख्य वजह वहां के जागरूक लोग भी हैं। इंदौर, देश का पहला ऐसा शहर है, जिसने ट्रंचिंग ग्राउंड को पूरी तरह खत्म कर वहां नए प्रयोग शुरू किए। वहीं, दून की बात करें तो यहां पिछले वर्ष ही सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शुरू हुआ है। जहां मौजूदा समय में पूरा कूड़ा नहीं पहुंच रहा है। लोग डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन वाहन के बजाए घर से बाहर सड़कों पर कूड़ा फेंक रहे हैं। 

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इंदौर और देहरादून में अंतर

मानक    अंक    देहरादून    इंदौर 
डायरेक्ट आब्जर्बेशन    1250    603    1241
सर्विस लेवल प्रोगेस    1250    559    1129
जनता का फीडबैक    1250    156    1239
सर्टिफिकेशन    1250    25    1050
कुल    5000    1343    4659

इसलिए इंदौर बना देश का नंबर वन शहर
-इंदौर देश का पहला शहर है, जहां ट्रंचिंग ग्राउंड को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। उसके स्थान पर लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं।
-कचरे की 100 प्रतिशत प्रोसेसिंग, बिल्डिंग मैटेरियल और खराब निर्माण सामग्री का कलेक्शन तथा उसका निपटान।
-कचरा उठाने में लगे वाहनों की मॉनिटरिंग के लिए जीपीएस तथा कंट्रोल रूम, हर जोन के लिए अलग-अलग टीवी स्क्रीन
-29 हजार से अधिक घरों में गीले कचरे से होम कंपोस्टिंग का कार्य
-देश के पहले डिस्पोजल फ्री मार्केट 
-पहला शहर जहां लाखों लोगों की मौजूदगी के दो जीरो वेस्ट इवेंट का हुआ आयोजन
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देहरादून को 384वां स्थान मिला है। जिसे अच्छा नहीं कहा जा सकता है। सफाई की जिम्मेदारी केवल नगर निगम की नहीं बल्कि जनता की भी है। उम्मीद है कि जनसहयोग के जरिये हम अगले स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर स्थान हासिल करेंगे।
- सुनील उनियाल गामा, मेयर देहरादून 

रैकिंग में सुधार के लिए काफी प्रयास किए गए थे। उसके बावजूद कुछ कमियां रही हैं। हालांकि हमें इससे बेहतर रैकिंग की उम्मीद थी। इस वर्ष बेहतर रैंक के लिए प्रयास किया जाएगा।
- विनय शंकर पांडेय, नगर आयुक्त 

इंदौर का मॉडल काफी शानदार है। निगम की टीम को वहां भेजना चाहिए, ताकि वहां के मॉडल को यहां स्थापित कर रैंक को सुधारा जा सके। लोगों को भी जागरूक होना होगा।
- अनूप नौटियाल, संस्थापक गति फाउंडेशन
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