उत्तराखंड में शिक्षकों के निलंबन में भी खेल चल रहा है। निलंबन के डर से कई शिक्षकों ने जहां बैक डेट में ज्वाइन कर लिया तो कुछ डेड लाइन समाप्त होने के बाद स्कूल पहुंचकर निलंबन से बच गए।
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शिक्षा विभाग के आंकड़े भी कुछ यही बता रहे हैं। प्रदेश में डेड लाइन 16 नवंबर तक बेसिक और माध्यमिक के लगभग 273 शिक्षक स्कूल नहीं पहुंचे, लेकिन अब तक निलंबन केवल 75 शिक्षकों का ही हुआ है। ऐसे में चहेतों को मौका देकर अन्य शिक्षकों के साथ धोखा हुआ है।
50 फीसदी से अधिक शिक्षक निलंबन से बचे
शिक्षकों के अनिवार्य तबादलों के बाद कई बार की चेतावनी के बावजूद नई तैनाती पर ज्वाइन न करने वाले शिक्षकों के लिए 16 नंवबर डेड लाइन तय की गई थी। शासन ने शिक्षकों को चेताया था कि 16 नवंबर तक वे स्कूल नहीं पहुंचे तो सस्पेंड कर दिए जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। स्कूल न पहुंचने के बावजूद 50 फीसदी से अधिक शिक्षक निलंबन से बच गए।
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यदि माध्यमिक शिक्षकों की बात करें तो सोमवार 18 नवंबर तक गढ़वाल मंडल के 23 और कुमाऊँ मंडल के 18 शिक्षकों ने नई तैनाती स्थलों पर ज्वाइन नहीं किया।
वहीं लगभग 235 बेसिक के शिक्षक स्कूल नहीं पहुंचे। लेकिन अब तक केवल 75 शिक्षकों का ही निलंबन हुआ। खुद विभागीय अधिकारियों का भी मानना है कि निलंबन के डर से कई शिक्षकों ने डेड लाइन समाप्त होने के बाद नई तैनाती स्थल पर ज्वाइन किया है।
दुर्गम में जाने वाले इनाम पाएंगे और जो घर में जमा रहेगा और आदेश के बाद भी नई तैनाती स्थल पर ज्वाइन नहीं करेगा उसे सस्पेंड किया जाएगा। शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई अभियान अभी थमा नहीं है। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
- मंत्री प्रसाद नैथानी, शिक्षा मंत्री
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