पुनीत कहते हैं मुझे आज भी याद है, 1996 में जब मैं पहली बार पिता नरेंद्र स्वरुप मित्तल के साथ दिल्ली स्थित कार्यालय में तत्कालीन सूचना प्रसारण मंत्री सुषमा स्वराज से मिला था। मेरे लिए वो पल आज भी यादगार है। मेरी उम्र उस समय 25 वर्ष थी।
सुषमा दीदी को उत्तराखंड से विशेष लगाव था। वह जब भी उत्तराखंड आतीं तो हम उनसे मिलने जरूर जाते थे। पिताजी के साथ मुझे भी उनके साथ वक्त गुजारने का मौका मिला। उन्हें हम प्यार से दीदी एक पुकारते थे। वर्ष 2011 में जब वह पार्टी के कार्यक्रम के लिए आईं थीं तो मुझे उनका सारथी बनने का अवसर मिला।
मैं अपनी कार से उन्हें कार्यक्रम स्थल तक लेकर गया। मित्तल बताते हैं कि सुषमा दीदी आखिरी बार मई 2015 में दून आईं थीं। उन्होंने बन्नू स्कूल मैदान और रेस कोर्स में जनसभा को संबोधित किया था। वह उत्तराखंड के लोगों से विशेष लगाव रखती थीं और उनकी हर संभव मदद करती थीं।