उत्तराखंड के कार्बेट नेशनल पार्क में शूटिंग पूरी करने के बाद अब 'सरवाइवर मैन' की नजर प्रधानमंत्री मोदी की नगरी पर है।
लेस स्ट्राउट अब वाराणसी की ओर रुख करने की तैयारी में है। जानकारों का कहना है कि लेस वाराणसी को अपने कार्यक्रम बियोंड सरवाइवल की निगाह से देख चुके हैं। स्ट्राउट इस सीरियल के तहत अभी तक कई आदिम सभ्यताओं के वर्तमान के साथ तालमेल के संबंध को सामने ला चुके हैं।
डिस्कवरी इंटरनेशनल चैनल के सबसे ज्यादा टीआरपी वाले कार्यक्रमों में से एक है सरवाइवर मैन। स्ट्राउट सोमवार को सरवाइवर मैन की शूटिंग कर रामनगर से निकल गए। उनका कहना था कि अब उनकी निगाह उत्तरी क्षेत्र पर है। अत्यधिक ठंडे इलाकों की ओर रुख करने की चुनौती स्ट्राउट पहले भी निभा चुके हैं।
इस बार भी रामनगर आने से पहले स्ट्राउट ने डोडीताल में शूटिंग करने का मन बनाया था। इसके लिए नेहरू पर्वतारोहण संस्थान ने जरूरी तैयारी भी कर ली थी। लेकिन डोडीताल का तापमान पांच डिग्री से कम होने के कारण स्ट्राउट ने किसी और स्थान का चयन करने को कहा।
आदिम सभ्यताओं के सामने टिक पाने की है कहानी
निम सूत्रों के मुताबिक तापमान को देखते हुए ही रामनगर का चयन किया गया। स्ट्राउट अब उत्तर क्षेत्र में सरवाइवर मैन की नई थीम तलाश रहे हैं पर उनकी निगाह वाराणसी पर भी है। स्ट्राउट का एक और टीवी शो है बियोंड सरवाइवल। इस शो में स्ट्राउट आदिम सभ्यताओं और परंपराओं के आधुनिक ज्ञान के सामने टिक पाने, अपना अस्तित्व बचाए रहने की कहानी को बयां करते हैं।
इससे पहले स्ट्राउट श्रीलंका, मेडागास्कर आदि में इस तरह के शो दे चुके हैं। वाराणसी के इसी आदिम और जीवंत पहलु को उकेरने का मन अब स्ट्राउट का है। हालांकि यह कब तक होगा यह अभी स्ट्राउट ने स्पष्ट नहीं किया। ग्रीन प्यूपिल के रूपेश राय के मुताबिक स्ट्राउट ग्रीन प्यूपिल के साथ सांझा कार्यक्रम में काम करने का मन बना रहे हैं।
वाराणसी भी उसकी एक कड़ी हो सकता है। जाते-जाते स्ट्राउट ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान, ग्रीन प्यूपिल और वन विभाग के सहयोग को भी सराहा।
कौन है सरवाइवर मैन
लेस स्ट्राउड का एक प्रोग्राम है सरवाइवर मैन। यह प्रोगाम कनाडा, अमेरिका सहित यूरोप और अन्य कई स्थानों पर अधिकतम टीआरपी वाला साबित हुआ है। सरवाइवर मैन अब तक अलास्का और अन्य दुर्गम स्थानों पर सात दिन तक बिना खाना, पानी आदि के सुरक्षित रहने का प्रदर्शन कर चुका है।