अपंजीकृत मदरसों पर सरकार की सख्ती के बाद जिला प्रशासन की ओर से कराए गए सर्वे की रिपोर्ट आ गई है। तहसीलवार हुए सर्वे में सामने आया है कि जिले में 57 मदरसे बगैर पंजीकरण ही संचालित हो रहे हैं। यह संख्या विकासनगर क्षेत्र में सबसे अधिक है, वहां 34 मदरसों को बिना पंजीकरण संचालित किया जा रहा है।
विकासनगर के बाद सदर दूसरे स्थान पर है। यहां 16 मदरसे रजिस्ट्रेशन के बगैर चलाए जा रहे हैं। सर्वे रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। डीएम सविन बंसल के मुताबिक मदरसा बोर्ड की नियमावली के अनुसार मदरसों को कार्रवाई के दायरे में लाया जाएगा।
जिलाधिकारी ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिए थे कि तहसीलों में संचालित पंजीकृत और अपंजीकृत मदरसों का पूरा विवरण उपलब्ध कराएं। पंजीकृत मदरसों की स्थिति तथा उसमें पढ़ाए जा रहे पाठ्यक्रम के बारे में जानकारी दें। मिड डे मील, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, मूलभूत सुविधाओं पर भी रिपोर्ट मांगी गई थी। डीएम ने कहा कि मदरसों के सर्वे की रिपोर्ट आ चुकी है। इसका अध्ययन किया जा रहा है। मदरसा बोर्ड से इस पर राय भी ली जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई होगी।
मसूरी और ऋषिकेश में नहीं है एक भी मदरसा
तहसीलों से विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को भेज दी गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि विकासनगर क्षेत्र में सबसे अधिक मदरसे चल रहे हैं। यहां 27 मदरसे पंजीकृत और 34 अपंजीकृत हैं। वहीं, सदर में अपंजीकृत मदरसे 16 और पंजीकृत की संख्या आठ है। डोईवाला में पंजीकृत मदरसा एक, अपंजीकृत छह हैं। इसके अलावा ऋषिकेश में कोई मदरसा नहीं चल रहा है। कालसी में कोई पंजीकृत मदरसा नहीं है, जबकि अपंजीकृत मदरसे की संख्या एक है। चकराता और त्यूणी में कोई अपंजीकृत मदरसा नहीं है। इसी तरह मसूरी में एक भी मदरसा नहीं है।
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मिड डे मिल तो मिलता है पर खेल मैदान नहीं
रिपोर्ट में बताया गया है कि पंजीकृत और अपंजीकृत मदरसों के पास अपनी जगह तो है, लेकिन खेल मैदान नहीं है। पंजीकृत मदरसे में मिड डे मिल दिया जा रहा है, लेकिन बगैर पंजीकरण चल रहे मदरसों में ऐसी कोई सुविधा नहीं है। हालांकि, आवासीय सुविधा दोनों तरह के मदरसों में है। अधिकांश मदरसों में दीनी तालीम ही दी जा रही है। मदरसों में अन्य प्रदेशों के छात्रों की संख्या बहुत कम है।