बाद में दंपति को जानकारी मिली कि उनका दूसरा बच्चा भी जीवित है, जिसे सरोगेट मदर ने छिपा लिया है। इस पर दंपति ने दूसरा बच्चा पाने के लिए सरोगेट मदर से संपर्क किया और अतिरिक्त धनराशि देने की भी बात कही, लेकिन सरोगेट मदर ने दूसरे बच्चे की जानकारी नहीं दी।
इसके बाद वर्ष 2018 में दंपति ने आरोपी महिला (सरोगेट मदर) के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज करा दिया। विवेचना में पुलिस के सामने आया कि सरोगेट मदर ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था और दोनों ही जीवित हैं, लेकिन एक बच्चा छिपाकर सरोगेट मदर ने अपने रिश्तेदार को दे दिया। इसके बाद आरोपी सरोगेट मदर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।
इसके बाद से प्रभारी निरीक्षक कोतवाली ऋषिकेश के नेतृत्व में पुलिस टीम बच्चे और आरोपी रिश्तेदार की तलाश कर रही थी। एसपी देहात प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि रविवार रात आरोपी रिश्तेदार को बच्चे के साथ मेरठ से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी को मंगलवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा। बच्चे को फिलहाल दंपति के सुपुर्द किया गया है। कोर्ट के आदेश के बाद बच्चे की स्थाई तौर पर सुपुर्दगी की जाएगी।
उस समय महिला की बात पर भरोसा कर लिया था, लेकिन 2015 में मेरठ में सरोगेसी मां के साथ एक बालक को देखकर मां का माथा ठनक गया था, क्योंकि उसका हुलिया उनके बेटे से काफी मिलता-जुलता था।
पीड़ित मां ने बताया कि दूसरे बच्चे के जिंदा होने का दावा किया तो महिला बच्चे समेत गायब हो गई। 2017 में पहली बार ऋषिकेश कोतवाली में लिखित शिकायत की। पुलिस सरोगेसी से जुड़े एक शख्स को मेरठ से उठाकर कोतवाली ले आई। पुलिस ने उनकी बात को झुठलाते हुए मामला थाने से निपटा दिया। उस समय पुलिस से बहुत निराशा हुई थी। अमर उजाला ने उनकी बिना शिकायत के ऋषिकेश पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाकर उनके हौसलों को बढ़ाने का काम किया।
एसएसपी की एसटीएफ रिधिम अग्रवाल ने खबर का संज्ञान लेकर उनके दर्द को सुना और सरोगेसी मां को पश्चिम बंगाल से ढूंढ निकाला। फिर भी बालक नहीं मिला। ऋषिकेश कोतवाली निरीक्षक रितेश शाह ने टीम के साथ कई माह के प्रयासों के बाद लाड़ले को ढूंढ निकाला। पुलिस और अमर उजाला को सलाम। उम्मीद जताई कि आगे भी वे इसी तरह सच के साथ खड़े रहेंगे।