पहाड़ की जनभावनाओं के केंद्र गैरसैंण में बृहस्पतिवार को रेल मंत्री सुरेश प्रभु कई परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे, लेकिन इन परियोजनाओं में एक भी पहाड़ (गढ़वाल) के लिए नहीं है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या राजनीतिक दल अपनी सियासत चमकाने के लिए गैरसैंण का प्लेटफार्म के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं? कांग्रेस जहां गैरसैंण राजधानी के मुद्दे पर सत्र आयोजन से आगे नहीं बढ़ पाई, वहीं सत्र से पहले दिन गायब हुई भाजपा अब दोबारा गैरसैंण पहुंच कर अपना पहाड़ी प्रेम दर्शाने की सियासी कोशिश में है।
रेल मंत्री को गैरसैंण में हेलीकॉप्टर से उतार कर भाजपा कुमाऊं-गढ़वाल के मैदानी इलाकों की रेल परियोजनाओं के शिलान्यास करवाएगी। उधर, राजधानी को लेकर बैकफुट पर आई कांग्रेस अब रेल मंत्री के गैरसैंण दौरे पर सवाल खड़े कर रही है।
भाजपा और कांग्रेस गैरसैंण को सियासी रंग देकर उसे चुनावी मुद्दा बनाने तक सीमित हैं। राजधानी पर दोनों ही बचते दिख रहे हैं। विधान भवन, विधायक हॉस्टल बनाने के बाद भी कांग्रेस गैरसैंण को स्थायी या अस्थायी राजधानी बनाने से बच रही है, जबकि भाजपा राजधानी की बात करने की जगह निर्माण कार्यों में घपले घोटालों की राग छेड़कर मुद्दे को भटकाती नजर आ रही है।