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देहरादून में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया ब्रेक

Wed, 04 Jul 2018 08:38 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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supreme court
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राजधानी देहरादून में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के बीच अतिक्रमणकारियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। उच्चतम न्यायालय ने दून निवासी सुनीता की विशेष राहत याचिका (एसएलपी-सिविल) पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के आदेश को संशोधित कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अतिक्रमण हटाते हुए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत अतिक्रमणकारी को सुनवाई का मौका दिया जाना चाहिए। लिहाजा, सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम को पुराने अतिक्रमण पर नोटिस भेजकर सुनवाई करने के बाद फैसला लेने को कहा है।

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18 जून 2018 को एक जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय नैनीताल ने अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी किए थे। उच्च न्यायालय ने कहा था कि अगर देहरादून की सड़कों से चार सप्ताह के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो मुख्य सचिव इसके लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। राजधानी को चार जोन में बांटकर 28 जून से अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू हो गया था। अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम, एमडीडीए सहित सभी विभागों की टीम बनाई गई थी। 

इस बीच दून निवासी सुनीता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश एएम खानविलकर और न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के 18 जून को आए फैसले को मोडिफाई कर दिया है। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अतिक्रमण पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। साथ ही नगर निगम को निर्देश जारी किए हैं कि अतिक्रमण हटाने में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन करते हुए अतिक्रमणकारियों को सुनवाई का मौका दिया जाए।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत सबसे पहले एक समिति गठित की जाएगी। इसके बाद सभी संबंधित विभागों से अतिक्रमण की सूचना मांगी जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर अतिक्रमणकारियों को नोटिस भेजा जाएगा। उनकी सुनवाई की जाएगी। सुनवाई के बाद निगम फैसला लेगा। फैसले के आधार पर अतिक्रमण हटाया जाएगा।
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- विजय कुमार जोगदंडे, नगर आयुक्त, नगर निगम

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