सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि कोरोना काल में निजी स्कूल अभिभावकों से फीस के लिए दबाव नहीं डाल सकते। चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
दरअसल, कुछ स्कूल और उनके एसोसिएशन ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की थी। स्कूलों का कहना था कि ऑनलाइन क्लास दे रहे हैं, लेकिन 10 फीसदी छात्र ही फीस दे रहे हैं। उनका कहना था कि नियमित रूप से ऑनलाइन क्लास ले रहे हैं, लिहाजा अभिभावकों को फीस देने का निर्देश दिया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि शिक्षा सचिव के 22 जून, 2020 के आदेशानुसार स्कूल प्रबंधन अभिभावकों पर फीस के लिए दबाव नहीं बनाएगा। सिर्फ वही स्कूल फीस ले सकते हैं, जो छात्रों को ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं, लेकिन फीस के लिए दबाव नहीं बनाया जा सकता।
यह 26 लाख से अधिक अभिभावकों से जुड़ा मामला है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया है। हम शुरुआत से ही यह मांग कर रहे थे कि प्राइवेट स्कूल अभिभावकों को राहत दें। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद प्राइवेट स्कूलों को अभिभावकों को राहत देनी पड़ेगी।
-कुंवर जपिंदर सिंह, हाईकोर्ट के याचिकाकर्ता