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टिहरी बांध प्रभावितों पर दो सप्ताह में फैसला ले केंद्र: SC

Wed, 16 Jul 2014 07:10 PM IST
अमर उजाला, नई टिहरी
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से टिहरी बांध प्रभावित 414 परिवारों के विस्थापन के बारे में दो सप्ताह के भीतर फैसला लेने और न्यायालय को भी अवगत कराने का निर्देश दिया।
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विस्थापन के लिए हरिद्वार जिले के खानपुर में चयनित जमीन को लेकर केंद्र की तरफ से कोई निर्णय न लेने पर कोर्ट ने गहरी नाराजगी भी जताई।

टिहरी बांध प्रभावितों और विस्थापितों की समस्याओं को लेकर पूर्व विधायक किशोर उपाध्याय, जोत सिंह बिष्ट, दर्शनी रावत और महिपाल नेगी की ओर से 2005 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।

याचिका में बांध प्रभावित गांवों में आने-जाने के लिए पुलों का निर्माण न होने, पेयजल योजनाओं का निर्माण, ग्रामीण व्यापारियों का प्रतिकर, आंशिक डूब क्षेत्र के ग्रामों का पुनर्वास सहित अन्य समस्याओं का निराकरण न होने की बात कही गई थी।
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देरी के लिए केंद्र जिम्मेदार: राज्य सरकार

कोर्ट में 4 मार्च 2014 को हुई सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार ने शपथ पत्र दिया था कि बांध प्रभावित 414 परिवारों के विस्थापन के लिए हरिद्वार जिले के खानपुर में जमीन चिह्नित की गई है। वह जमीन वन विभाग की है, इसलिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।

इस पर न्यायालय ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह के अंदर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। मंगलवार को जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियर जौसिफ की संयुक्त खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।

राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता बीनू टम्टा ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने न्यायालय को बताया कि खानपुर में वन भूमि होने के कारण निर्णय केंद्र को लेना था। बताया कि केंद्र में नई सरकार की प्रक्रिया के चलते विस्थापन मामले में विलंब हुआ है।

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता शांति प्रसाद भट्ट ने फोन पर बताया कि सुनवाई के दौरान संयुक्त खंडपीठ ने केंद्र सरकार को दो सप्ताह के भीतर निर्णय लेकर कोर्ट को इसकी जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।

अधिवक्ता भट्ट ने बताया कि उनकी ओर से मदन नेगी क्षेत्र के पांच गांवों के 1336 परिवारों के विस्थापन का मामला भी कोर्ट के सामने रखा गया।
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