पीएमओ ने सूचना स्पष्ट न होने के आधार पर इस आवेदन को खारिज किया था। इसके बाद पीएमओ ने यह कहते हुए सूचना नहीं दी कि इससे काले धन की जांच प्रभावित होगी और मंत्रियों के मामले में सूचना इतनी अधिक है कि इसे जुटाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है। इसके बाद केंद्रीय सूचना आयोग, दिल्ली हाईकोर्ट की एकल खंडपीठ में यह मामला पहुंचा।
हाईकोर्ट ने भी इस याचिका को खारिज किया था। हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए संजीव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। संजीव का कहना था कि हर नागरिक को यह जानने का हक है कि जनप्रतिनिधियों के भ्रष्टाचार के क्या-क्या मामले हैं।
संजीव की इस याचिका को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय सूचना आयोग को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब देने को कहा है। संजीव के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने इसके बाद ट्वीट किया कि काला धन और मंत्रियों के भ्रष्टाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पीएमओ को नोटिस जारी किया है।