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रुड़की नगर निगम चुनाव: याचिका कर्ताओं का दावा, उनके पक्ष में है सुप्रीम कोर्ट का फैसला

Thu, 25 Jul 2019 08:44 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : फाइल फोटो
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रुड़की नगर निगम चुनाव का मसला अजीबोगरीब स्थिति में फंस गया है। इन स्थितियों के बीच सरकार ने राज्य निर्वाचन आयोग को सूचित किया है कि वह उसके प्रस्तावित चुनाव कार्यक्रम से सहमत है। सूत्रों के अनुसार आयोग ने 20 अगस्त को नगर निगम चुनाव के लिए मतदान और 22 अगस्त को मतगणना कराना प्रस्तावित किया है। वहीं याचिका कर्ताओं का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में है। 

 

प्रस्तावित चुनाव कार्यक्रम पर सहमति के बाद सरकार को अपने स्तर पर अधिसूचना जारी करनी थी। इसके बाद आयोग चुनाव अधिसूचना जब जारी करता तो उसी वक्त से आदर्श आचार सहिता लागू हो जाती, लेकिन कानूनी पेचीदगी की वजह से सरकार ने फिलहाल अधिसूचना पर हाथ रोक लिए है। इस बीच, सरकार ने न्याय विभाग से परामर्श लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शहरी विकास विभाग की ओर से न्याय विभाग को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा गया है।

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रुड़की नगर निगम चुनाव का मामला एक बार फिर उलझा नजर आ रहा है। सरकार ने रुड़की नगर निगम के आरक्षण की अधिसूचना जारी कर इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट भी भी सूचित कर दिया है। इससे पहले राज्य निर्वाचन आयोग को भी यह अधिसूचना भेजी गई थी, जिसके आधार पर उसने चुनाव का प्रस्तावित कार्यक्रम सरकार को भेजा था। शहरी विकास सचिव मदन कौशिक ने बुधवार को स्वीकार किया कि राज्य निर्वाचन आयोग का प्रस्तावित चुनाव कार्यक्रम सरकार को प्राप्त हो गया था।

इस कार्यक्रम पर सरकार सहमत है और निर्वाचन आयोग को सहमति की सूचना दे दी है। इस मामले में पेच इसलिए फंस गया है कि मंगलवार को हाईकोर्ट ने पुराने परिसीमन पर दो माह में रुड़की में चुनाव कराने के आदेश दिए हैं। पुराने परिसीमन में रामपुर और पाडली गुर्जर गांव नगर निगम का हिस्सा हैं, वहीं सरकार ने जिस नए परिसीमन पर आरक्षण की अधिसूचना जारी की है, उसमें यह दोनों गांव नगर निगम से बाहर हैं। इस बीच, सरकार कह चुकी है कि वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से मार्गदर्शन लेगी। इस क्रम में कदम आगे बढ़ाते हुए बुधवार को सरकार ने न्याय विभाग से परामर्श के लिए फाइल आगे बढ़ा दी।
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याचिका कर्ताओं का दावा सुप्रीम कोर्ट से फैसला हमारे पक्ष में 

सुप्रीम कोर्ट ने रुड़की नगर निगम चुनाव पर क्या फैसला दिया है, यह साफ नहीं हुआ, अलबत्ता याचिकाकर्ताओं ने फैसला अपने पक्ष में आने का दावा किया। इनमें से एक पूर्व मेयर यशपाल राणा की ओर से हाईकोर्ट के आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट में केविट में दाखिल की गई है।

उन्होंने बताया कि 24 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई थी। दावा किया कि इसमें सुप्रीम कोर्ट ने हुए राज्य सरकार की सभी दलीलें खारिज कर दी है। अब प्रदेश सरकार को हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार चुनाव कराने हैं। ऐसे में अब जल्द ही शासन की ओर से चुनाव संबंधी दिशा निर्देश जारी होने की उम्मीद है। नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त चंद्रकांत भट्ट ने बताया कि शासन की ओर से जो भी दिशा निर्देश मिलेंगे। उसके अनुरूप चुनाव की आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

निगम में सवा साल से अपनी सरकार नहीं होने के कारण लोगों को हरिद्वार की दौड़ लगानी पड़ रही है। इससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।  रुड़की नगर निगम के चुनाव का मामला पहले शासन स्तर पर और इसके बाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा। रामपुर और पाड़ली गुर्जर गांव का मामला पिछले चार सालों से नगर निगम के चुनाव पर संशय के बादलों की तरह छाया हुआ था। 

चार चरणों में करनी होगी प्रक्रिया पूरी 
रामपुर और पाड़ली गुर्जर को शामिल करते हुए चुनाव कराने की स्थिति में नगर निगम में काफी एक्सरसाइज करनी होगी। सहायक नगर आयुक्त चंद्रकांत भट्ट ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया के तहत पहले परिसीमन कराना होगा। इसके बाद वार्डों का गठन होगा। वार्डों के गठन के बाद ओबीसी सर्वे होगा और इसके बाद वार्डों का आरक्षण, आपत्ति और अंतिम आरक्षण सूची जारी करने की प्रक्रिया संपन्न होगी। जानकारों की माने तो इन सभी प्रक्रिया को पूरी करने में दो से ढाई महीने का समय लगेगा। इसके बाद चुनाव कार्यक्रम घोषित होगा।  

सेलाकुई पर आए फैसले को भी मिलेगी चुनौती
सेलाकुई नगर पंचायत के वजूद को खत्म करने के आदेश को भी सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। रुड़की नगर निगम के साथ ही हाईकोर्ट ने सेलाकुई नगर पंचायत के मामले में भी मंगलवार को आदेश जारी किए थे। 2015 में गठित सेलाकुई नगर पंचायत को फिर से ग्राम पंचायत बनाने के आदेश हुए हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि उसने अभी हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन नहीं किया है। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सेलाकुई नगर पंचायत से जुडे़ आदेश का अध्ययन किया जाएगा, लेकिन ये जरूर है कि इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को चुनाव के लिए समय देने संबंधी याचिका को निरस्त कर दिया है। अब प्रदेश सरकार के पास हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन के अलावा कोई विकल्प नहीं है। 
-सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं के वकील 
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